Saturday, January 9, 2016

हिंदू परम्पराओं से जुड़े ये वैज्ञानिक तर्क


एक गोत्र में शादी क्यूँ नहीं..
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वैज्ञानिक कारण..!
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एक दिन डिस्कवरी पर
जेनेटिक बीमारियों से
सम्बन्धित एक ज्ञानवर्धक कार्यक्रम था

उस प्रोग्राम में

एक अमेरिकी वैज्ञानिक ने कहा की
जेनेटिक बीमारी न हो
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इसका एक ही इलाज है
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और वो है
"सेपरेशन ऑफ़ जींस"
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मतलब अपने नजदीकी रिश्तेदारो में
विवाह नही करना चाहिए
क्योकि
नजदीकी रिश्तेदारों में
जींस सेपरेट (विभाजन) नही हो पाता
और
जींस लिंकेज्ड बीमारियाँ जैसे
हिमोफिलिया, कलर ब्लाईंडनेस, और
एल्बोनिज्म होने की
100% चांस होती है ..

फिर बहुत ख़ुशी हुई
जब उसी कार्यक्रम में
ये दिखाया गया की
आखिर
"हिन्दूधर्म" में
********
हजारों-हजारों सालों पहले
***************
जींस और डीएनए के बारे में
****************
कैसे लिखा गया है ?
************
हिंदुत्व में गोत्र होते है
*************
और
एक गोत्र के लोग
आपस में शादी नही कर सकते
ताकि
जींस सेपरेट (विभाजित) रहे.. ******************
उस वैज्ञानिक ने कहा की
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आज पूरे विश्व को मानना पड़ेगा की
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"हिन्दूधर्म ही"
*********
विश्व का एकमात्र ऐसा धर्म है जो
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"विज्ञान पर आधारित" है !
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हिंदू परम्पराओं से जुड़े
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ये वैज्ञानिक तर्क:
%%%%%%%
1-
कान छिदवाने की परम्परा:
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भारत में लगभग सभी धर्मों में
कान छिदवाने की
परम्परा है।
वैज्ञानिक तर्क-
%%%%%%
दर्शनशास्त्री मानते हैं कि
इससे सोचने की शक्त‍ि बढ़ती है।
जबकि
डॉक्टरों का मानना है कि इससे बोली
अच्छी होती है और
कानों से होकर दिमाग तक जाने वाली नस का
रक्त संचार नियंत्रित रहता है।

2-
माथे पर कुमकुम/तिलक
%%%%%%%%%%
महिलाएं एवं पुरुष माथे पर
कुमकुम या तिलक लगाते हैं
वैज्ञानिक तर्क-
%%%%%%
आंखों के बीच में
माथे तक एक नस जाती है।
कुमकुम या तिलक लगाने से
उस जगह की ऊर्जा बनी रहती है।
माथे पर तिलक लगाते वक्त जब अंगूठे या उंगली से प्रेशर पड़ता है,
तब चेहरे की त्वचा को रक्त सप्लाई करने वाली मांसपेशी सक्रिय हो जाती है।
इससे चेहरे की कोश‍िकाओं तक अच्छी तरह रक्त पहुंचता

3-
जमीन पर बैठकर भोजन
%%%%%%%%%%
भारतीय संस्कृति के अनुसार
जमीन पर बैठकर भोजन करना अच्छी बात होती है
वैज्ञानिक तर्क-
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पलती मारकर बैठना
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एक प्रकार का योग आसन है।
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इस पोजीशन में बैठने से
**************
मस्त‍िष्क शांत रहता है और
भोजन करते वक्त
अगर दिमाग शांत हो तो
पाचन क्रिया अच्छी रहती है। इस पोजीशन में बैठते ही
खुद-ब-खुद दिमाग से 1 सिगनल
पेट तक जाता है, कि
वह भोजन के लिये तैयार हो जाये

4-
हाथ जोड़कर नमस्ते करना
%%%%%%%%%%%

जब किसी से मिलते हैं तो
हाथ जोड़कर नमस्ते अथवा नमस्कार करते हैं।
वैज्ञानिक तर्क-
%%%%%%
जब सभी उंगलियों के शीर्ष
एक दूसरे के संपर्क में आते हैं
और उन पर दबाव पड़ता है।
एक्यूप्रेशर के कारण उसका
सीधा असर
हमारी आंखों, कानों और दिमाग पर होता है,
ताकि सामने वाले व्यक्त‍ि को हम लंबे समय तक याद रख सकें।
दूसरा तर्क यह कि हाथ मिलाने (पश्च‍िमी सभ्यता) के बजाये अगर आप नमस्ते करते हैं
तो सामने वाले के शरीर के कीटाणु आप तक नहीं पहुंच सकते।
अगर सामने वाले को स्वाइन फ्लू भी है तो भी वह वायरस आप तक नहीं पहुंचेगा।

5-
भोजन की शुरुआत तीखे से और
%%%%%%%%%%%%
अंत मीठे से
%%%%%
जब भी कोई धार्मिक या
पारिवारिक अनुष्ठान होता है तो
भोजन की शुरुआत तीखे से और
अंत मीठे से होता है।
वैज्ञानिक तर्क-
%%%%%%
तीखा खाने से
हमारे पेट के अंदर
पाचन तत्व एवं अम्ल सक्रिय हो जाते हैं
इससे
पाचन तंत्र ठीक से संचालित होता है
अंत में
मीठा खाने से
अम्ल की तीव्रता कम हो जाती है
इससे पेट में जलन नहीं होती है

6-
पीपल की पूजा
%%%%%%
तमाम लोग सोचते हैं कि
पीपल की पूजा करने से
भूत-प्रेत दूर भागते हैं।
वैज्ञानिक तर्क-
%%%%%%
इसकी पूजा इसलिये की जाती है,
ताकि
इस पेड़ के प्रति लोगों का सम्मान बढ़े
और
उसे काटें नहीं
पीपल एक मात्र ऐसा पेड़ है, जो
रात में भी ऑक्सीजन प्रवाहित करता है

7-
दक्ष‍िण की तरफ सिर करके सोना
%%%%%%%%%%%%%
दक्ष‍िण की तरफ कोई पैर करके सोता है
तो लोग कहते हैं कि
बुरे सपने आयेंगे
भूत प्रेत का साया आयेगा,poorvajon ka esthaan,आदि
इसलिये
उत्तर की ओर पैर करके सोयें
वैज्ञानिक तर्क-
%%%%%%
जब हम
उत्तर की ओर सिर करके सोते हैं,
तब
हमारा शरीर पृथ्वी की चुंबकीय तरंगों की सीध में आ जाता है।
शरीर में मौजूद आयरन यानी लोहा
दिमाग की ओर संचारित होने लगता है
इससे अलजाइमर,
परकिंसन, या दिमाग संबंधी बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है
यही नहीं रक्तचाप भी बढ़ जाता है

8-
सूर्य नमस्कार
%%%%%%
हिंदुओं में
सुबह उठकर सूर्य को जल चढ़ाते
नमस्कार करने की परम्परा है।
वैज्ञानिक तर्क-
%%%%%%
पानी के बीच से आने वाली
सूर्य की किरणें जब
आंखों में पहुंचती हैं तब
हमारी आंखों की रौशनी अच्छी होती है

9-
सिर पर चोटी
%%%%%%
हिंदू धर्म में
ऋषि मुनी सिर पर चुटिया रखते थे
आज भी लोग रखते हैं
वैज्ञानिक तर्क-
%%%%%%
जिस जगह पर चुटिया रखी जाती है
उस जगह पर
दिमाग की सारी नसें आकर मिलती हैं
इससे दिमाग स्थ‍िर रहता है
और
इंसान को क्रोध नहीं आता
सोचने की क्षमता बढ़ती है।

10-
व्रत रखना
%%%%
कोई भी पूजा-पाठ, त्योहार होता है तो
लोग व्रत रखते हैं।
वैज्ञानिक तर्क-
%%%%%%
आयुर्वेद के अनुसार
व्रत करने से
पाचन क्रिया अच्छी होती है और
फलाहार लेने से
शरीर का डीटॉक्सीफिकेशन होता है
यानी
उसमें से खराब तत्व बाहर निकलते हैं
शोधकर्ताओं के अनुसार व्रत करने से
कैंसर का खतरा कम होता है
हृदय संबंधी रोगों,मधुमेह,आदि रोग भी
जल्दी नहीं लगते

11-
चरण स्पर्श करना
%%%%%%%
हिंदू मान्यता के अनुसार
जब भी आप किसी बड़े से मिलें तो
उसके चरण स्पर्श करें
यह हम बच्चों को भी सिखाते हैं
ताकि वे बड़ों का आदर करें
वैज्ञानिक तर्क-
%%%%%%
मस्त‍िष्क से निकलने वाली ऊर्जा
हाथों और सामने वाले पैरों से होते हुए
एक चक्र पूरा करती है
इसे
कॉसमिक एनर्जी का प्रवाह कहते हैं
इसमें दो प्रकार से ऊर्जा का प्रवाह होता है
या तो
बड़े के पैरों से होते हुए छोटे के हाथों तक
या फिर
छोटे के हाथों से बड़ों के पैरों तक

12-
क्यों लगाया जाता है सिंदूर
%%%%%%%%%%%
शादीशुदा हिंदू महिलाएं सिंदूर लगाती हैं
वैज्ञानिक तर्क-
%%%%%%
सिंदूर में
हल्दी,चूना और मरकरी होता है
यह मिश्रण
शरीर के रक्तचाप को नियंत्रित करता है
चूंकि
इससे यौन उत्तेजनाएं भी बढ़ती हैं
इसीलिये
विधवा औरतों के लिये
सिंदूर लगाना वर्जित है
इससे स्ट्रेस कम होता है।

13-
तुलसी के पेड़ की पूजा
%%%%%%%%%
तुलसी की पूजा करने से घर में समृद्ध‍ि आती है
सुख शांति बनी रहती है।
वैज्ञानिक तर्क-
%%%%%%
तुलसी इम्यून सिस्टम को मजबूत करती है
लिहाजा अगर घर में पेड़ होगा तो
इसकी पत्त‍ियों का इस्तेमाल भी होगा और
उससे बीमारियां दूर होती हैं।

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मूली के उपयोग ओर लाभ फायदे


निरोगी काया अनमोल रत्न

क्‍या आपको पता है कि मूली जो कि घर-घर में सलाद और सब्‍जी के रूप में खाई जाती है, आपकी स्मरण शक्ति बढ़ा सकती है। इसमें विटामिन ए पाया जाता है जिससे दांतों को मजबूती मिलती है। मूली का सेवन बालों को गिरने से रोकता है। इसमें मजबूत विटामिन बी और विटामिन सी भी नर्वस सिस्टम को भी मजबूत करता है। यह सब्‍जी जमीन के अंदर पैदा होती है। यह पूरे विश्‍व भर में उगाई एंव खायी जाती है। मूली की अनेक प्रजातियाँ हैं जो आकार, रंग एवं पैदा होने में लगने वाले समय के आधार पर भिन्न-भिन्न होती है। मूली कच्ची खायें या इस के पत्तों की सब्जी बनाकर खाएं, हर प्रकार से बवासीर में लाभदायक है। गर्दे की खराबी से यदि पेशाब का बनना बन्द हो जाए तो मूली का रस दो औंस प्रति मात्रा पीने से वह फिर बनने लगता है। मूली खाने से मधुमेह में लाभ होता है। एक कच्ची मूली नित्य प्रातः उठते ही खाते रहने से कुछ दिनों में पीलिया रोग ठीक हो जाता है। गर्मी के प्रभाव से खट्टी डकारें आती हो तो एक कप मूली के रस में मिश्री मिलाकर पीने से लाभ होता है।

पेशाब कम बनना :-
गुर्दे की खराबी से यदि पेशाब का बनना बंद हो जाए तो मूली का रस 50 मिलीलीटर रोजाना पीने से, पेशाब फिर बनने लगता है।
आधा गिलास मूली के रस का सेवन करने से पेशाब के साथ होने वाली जलन और दर्द मिट जाता है।

पेट में दर्द :-
1 कप मूली के रस में नमक और मिर्च डालकर सेवन करने से पेट साफ हो जाता है और पेट का दर्द भी दूर हो जाता है।
मूली का लगभग 1 ग्राम के चौथे भाग के रस में आवश्यकतानुसार नमक और 3-4 कालीमिर्च का चूर्ण डालकर 3-4 बार रोगी को पिलाने से पेट के दर्द में लाभ मिलता है।
10 मिलीलीटर मूली का रस, 10 ग्राम यवक्षार, 50 ग्राम हिंग्वाष्टक चूर्ण, 50 ग्राम सोडा बाइकार्बोनेट, 2 ग्राम नौसादर, 10 ग्राम टार्टरी को मिलाकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण 3 ग्राम पानी के साथ खाने से हर प्रकार का पेट का दर्द दूर हो जाता है।
100 मिलीलीटर मूली का रस, 200 ग्राम घीकुंवार का रस, 50 मिलीलीटर अदरक का रस, 20 ग्राम सुहागे का फूल, 20 ग्राम नौसादर ठीकरी, 20 ग्राम पांचों नमक, 10-10 ग्राम चित्रकमूल, भुनी हींग, पीपल मूल, सोंठ, कालीमिर्च, पीपल, भुना जीरा, अजवाइन, लौह भस्म और 150 ग्राम पुराना गुड़। सभी औषधियों को पीसकर चूर्ण बनाकर मूली, घीकुंवार और अदरक के रस में मिलाकर, अमृतबान (एक बर्तन) में भरकर, अमृतबान का मुंह बंद करके 15 दिन धूप में रखें। 15 दिन बाद इसे छानकर बोतल में भर लें, आवश्यकतानुसार इस मिश्रण को 6-10 ग्राम तक लगभग 30 मिलीलीटर पानी में मिलाकर भोजन के बाद सेवन करने से पीलिया, मंदाग्नि, भूख न लगना, कब्ज और पेट में दर्द आदि पेट से सम्बंधित रोग दूर हो जाते हैं। मासिक-धर्म के कष्ट के साथ आता हो या अनियमित हो तो इस मिश्रण को 2 चाय वाले चम्मच-भर सुबह-शाम 3 सप्ताह तक नियमित रूप से सेवन करना लाभदायक है।
मूली के रस में कालीमिर्च और 1 चुटकी काला नमक मिलाकर खाने से लाभ होता है।
मूली के रस में काला या सेंधा नमक मिलाकर प्रयोग करने से पेट की पीड़ा में राहत मिलती है।
मूली की राख, करेला का रस, साण्डे की जड़ का रस, गडतूम्बा का रस को 10-10 ग्राम की मात्रा में मिलाकर रख लें। इस मिश्रण को दिन में 3 बार पीने से पीलिया, मधुमेह, पेट का दर्द, पथरी, औरतों के पेट में गैस का गोला होना, शरीर का मोटापा, पेट में कब्ज के कारण रूकी हुई वायु  तथा अजीर्ण आदि रोग ठीक हो जाते हैं।
20 से 40 मिलीलीटर मूली के पत्तों का रस सुबह-शाम सेवन करने से पेट के दर्द में आराम होता है।
मूली के रस में नींबू का रस और सेंधा नमक मिलाकर सेवन करने से वायु विकार से उत्पन्न पेट दर्द समाप्त हो जाता है।

मधुमेह (डायबिटिज) :-
मूली खाने से या इसका रस पीने से मधुमेह में लाभ होता है।
आधी मूली का रस दोपहर के समय मधुमेह रोगी को देने से लाभ होता है।

पीलिया (कामला, पाण्डु) :-
एक कच्ची मूली रोजाना सुबह सोकर उठने के बाद ही खाते रहने से कुछ ही दिनों में ही पीलिया रोग ठीक हो जाता है।
125 मिलीलीटर मूली के पत्तों के रस में 30 ग्राम चीनी मिलाकर सुबह के समय रोगी को पिलाएं, इसे पीते ही लाभ होगा और 1 सप्ताह में रोगी को आराम मिल जाएगा।
मूली में विटामिन `सी´, लौह, कैल्शियम, सोडियम, मैग्नेशियम और क्लोरीन आदि कई खनिज लवण होते हैं, जो लीवर (जिगर) की क्रिया को ठीक करते हैं। अत: पाण्डु (पीलिया) रोग में मूली का रस 100 से 150 मिलीलीटर की मात्रा में गुड़ के साथ दिन में 3 से 4 बार पीने से लाभ होता है।
मूली का रस 10-15 मिलीलीटर 1 उबाल आने तक पकाएं। बाद में उतारकर 25 ग्राम खांड या मिश्री मिलाकर पिलाएं, साथ ही मूली और मूली का साग खिलाते रहने से पीलिया ठीक हो जाता है।
सिरके में बने मूली के अचार के सेवन से पीलिया रोग ठीक हो जाता है।
लगभग आधा से 1 ग्राम मण्डूरभस्म, लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग लौह भस्म को शहद के साथ रोगी को चटायें। फिर ऊपर से 100 मिलीलीटर मूली के रस में चीनी मिलाकर पिलायें। इसे रोजाना सुबह-शाम पिलाने से 15-20 दिनों में पीलिया रोग ठीक हो जाता है।
मूली के ताजे पत्तों को पानी के साथ पीसकर उबाल लें इसमें दूध की भांति झाग ऊपर आ जाता है, इसको छानकर दिन में 3 बार पीने से कामला (पीलिया) रोग मिट जाता है।
पत्तों सहित मूली का रस निकाल लें, फिर दिन में 3 बार 20-20 ग्राम की मात्रा में पीने से पीलिया रोग में लाभ होता हैं।
70 मिलीलीटर मूली के रस में 40 ग्राम शक्कर (चीनी) मिलाकर पीने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है।
60 मिलीलीटर मूली के पत्ते का रस व 15 ग्राम खांड मिलाकर पीने से पीलिया रोग में आराम आता है।
मूली की सब्जी का सेवन करने से पीलिया रोग मिट जाता है।
मूली के 100 मिलीलीटर रस में 20 ग्राम शक्कर मिलाकर पीने से पीलिया रोग मिट जाता है। रोगी को मूली, संतरा पपीता, खरबूज, अंगूर और गन्ना आदि खाने को देना चाहिए।
मूली के पत्तों का 80 मिलीलीटर रस निकालकर किसी बर्तन में आग पर चढ़ा दें, जब पानी उबल जाए, तब उसे छानकर उसमें शक्कर मिलाकर खाली पेट पीने से पीलिया रोग मिट जाता है।
25 मिलीलीटर मूली के रस में लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग पिसा हुआ नौसादर मिलाकर सुबह-शाम लेने से पीलिया रोग दूर हो जाता है।
1 चम्मच कच्ची मूली का रस तथा उसमें 1 चुटकी जवाखार मिलाकर सेवन करें। कुछ दिनों तक सुबह, दोपहर और शाम को लगातार पीने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है।
मूली के पत्तों के 100 मिलीलीटर रस में शर्करा मिलाकर सुबह के समय पीने से पीलिया रोग में लाभ होता है। सुबह मूली खाने या इसका रस पीने से भी पीलिया रोग नष्ट होता है।
पीलिया के रोगी को गन्ने के रस के साथ मूली के रस का भी सेवन करना चाहिए, मूली के पत्तों की बिना चिकनाई वाली भुजिया खानी चाहिए।
आंतों के रोग:
मूली का रस आंतों में एण्टीसैप्टिक का कार्य करता हैं।

पथरी :-
30 से 35 ग्राम मूली के बीजों को आधा लीटर पानी में उबाल लें। जब पानी आधा शेष रह जाए तब इसे छानकर पीएं। यह प्रयोग कुछ दिनों तक करने से मूत्राशय की पथरी चूर-चूर होकर पेशाब के साथ बाहर आ जाएगी। यह प्रयोग 2 से 3 महीने निरन्तर जारी रखें। मूली का रस पीने से पित्ताशय की पथरी बनना बंद हो जाती है।
मूली का 20 मिलीलीटर रस हर 4 घंटे में 3 बार रोजाना पीएं तथा इसके पत्ते चबा-चबाकर खाएं। इससे मूत्राशय की पथरी चूर-चूर होकर पेशाब के साथ बाहर आ जायेगी। यह प्रयोग 2-3 महीने करें। मूली का रस पीने से पित्ताशय की पथरी  बनना बंद हो जाती है।
80 मिलीलीटर मूली के पत्तों के रस में 30 ग्राम अजमोद मिलाकर रोजाना पीने से पथरी गलकर निकल जाती है।
मूली में गड्ढ़ा कर उसमें शलगम के बीज डालकर गुन्था आटा ऊपर लपेटकर अंगारों पर सेंक लें, जब पक जाये तब निकालकर आटे को अलग करके मूली को खा लें। इससे पथरी के टुकड़े-टुकड़े होकर निकल जाती है।
मूली का रस निकालकर उसमें जौखार का चूर्ण (पाउडर) आधा ग्राम मिलाकर रोजाना सुबह-शाम खायें। इससे पेडू (नाभि के नीचे का हिस्सा) का दर्द और गैस दूर होती है तथा पथरी गल जाती है।
मूली के पत्तों के रस में शोरा डालकर सेवन करने से पथरी मिटती है।
एक गिलास पानी रात को सोते समय रखें। सुबह उस पानी में 2 ग्राम मूली का रस डालकर पीयें। इसको पीने से पथरी गलकर निकल जाती है।

मासिक-धर्म की रुकावट, अनियमितता व परेशानियां :-
मूली के बीजों के चूर्ण को 3 ग्राम की मात्रा में स्त्री को देने से मासिक-धर्म की रुकावट दूर होती है और मासिक-धर्म साफ होता है।
2-2 ग्राम मूली के बीज, गाजर के बीज, नागरमोथा और हथेली भर नीम की छाल को पीस-छानकर गर्म पानी के साथ सेवन करें। इसके सेवन के बाद में दूध का सेवन करना चाहिए। इससे बंद मासिकस्राव (रजोदर्शन) शुरू हो जाता है।
मासिक-धर्म (ऋतुस्राव) के रुकने के कारण चेहरे पर अधिक मुंहासे निकलते हों तो सुबह के समय मूली और उसके कोमल पत्ते चबाकर खाने से आराम मिलता है। मूली के रस का भी सेवन कर सकते हैं।
मूली, गाजर तथा मेथी के बीज 50-50 ग्राम की मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण तैयार कर लें। इस मिश्रण को 10 ग्राम लेकर पानी के साथ सेवन करने से मासिक-धर्म सम्बन्धी शिकायतें दूर हो जाती हैं। 3 ग्राम मूली के बीजों का चूर्ण सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करने से ऋतुस्राव (मासिक-धर्म का आना) का अवरोध नष्ट होता है।

बवासीर :-
मूली कच्ची खाएं तथा इसके पत्तों की सब्जी बनाकर खाएं। कच्ची मूली खाने से बवासीर से गिरने वाला रक्त (खून) बंद हो जाता है। बवासीर खूनी हो या बादी 1 कप मूली का रस लें। इसमें एक चम्मच देशी घी मिला लें। इसे रोजाना दिन में 2 बार सुबह-शाम पीने से लाभ होता है।
कोमल मूली के 40-60 मिलीलीटर बने काढ़े  में 1-2 ग्राम पीपर का चूर्ण मिलाकर पीने से बवासीर में आराम आता है।
एक सफेद मूली को काटकर नमक लगाकर रात को ओस में रख दें। इसे सुबह खाली पेट खाएं। मलत्याग के बाद गुदा भी मूली के पानी से धोएं या 125 मिलीलीटर मूली के रस में 100 ग्राम देशी घी की जलेबी एक घंटा भीगने दें। उसके तुरन्त बाद जलेबी खाकर पानी पी लें। इस प्रकार निरन्तर एक सप्ताह यह प्रयोग करने से जीवन भर के लिए प्रत्येक प्रकार की बवासीर ठीक हो जाएगी।
मूली के टुकड़े को घी में तलकर चीनी के साथ खाएं या मूली काटकर उस पर चीनी डालकर रोजाना 2 महीने तक खाने से भी बवासीर में लाभ होता है।
सूखी मूली की पोटली गर्म करके बवासीर के मस्सों पर सिंकाई करने से आराम आता है।
सूरन के चूर्ण को घी में भूनकर, मूली के रस में घोंटकर 1-1 ग्राम की गोलियां बना लें। फिर रोजाना सुबह-शाम 1-1 गोली ताजे पानी के साथ लेने से हर प्रकार की बवासीर नष्ट होती है।
रसौत और कलमी शोरा दोनों को बराबर लेकर, मूली के रस में घोटकर चने के बराबर गोलियां बना लें। रोजाना सुबह-शाम 1 से 4 गोली बासी पानी के साथ खाने से दोनों प्रकार की बवासीर नष्ट हो जाती है।
10-10 ग्राम नीम की निंबौली, कलमी शोरा, रसावत और हरड़ को लेकर बारीक पीस लें, फिर इसे मूली के रस में मिलाकर जंगली बेर के बराबर आकार की गोलियां बना लें। रोजाना सुबह-शाम 1-1 गोली ताजे पानी या मट्ठा के साथ खाने से खूनी बवासीर से खून आना पहले ही दिन बंद हो जाता है और बादी बवासीर 1 महीने के प्रयोग से पूरी तरह नष्ट हो जाती है।
मूली की जड़ को चाकू या छुरी से गोल-गोल चकतियां बनाकर घी में तलकर मिश्री के साथ खाने से बवासीर में बहुत लाभ होता है।
मूली के रस में नीम की निंबौली की गिरी पीसकर कपूर मिलाकर बवासीर के मस्सों पर लेप करने से मस्से सूख जाते हैं।
एक अच्छी मोटी मूली लेकर ऊपर की ओर से काटकर चाकू या छुरी से उसे खोखली करके उसमें 20 ग्राम `रसवत´ भरकर मूली के कटे हुए भाग का मुंह बंदकर कपड़े और मिट्टी से अच्छी तरह बंद कर दें। इसे कण्डों की आग में रखकर राख बना लें। दूसरे दिन रसवत निकालकर मूली के रस में कूट कर झड़बेरी के बराबर गोलियां बना लें। 1-1 गोली सुबह-शाम ताजे पानी के साथ सेवन करने से खूनी बवासीर कुछ ही दिनों में ठीक हो जाती है।
मूली के पत्तों को छाया में सुखाकर बारीक पीस लें, फिर इसमें इसी के समान मात्रा में चीनी, मिश्री या खांड मिलाकर रोजाना बासी मुंह 10 ग्राम की मात्रा में खाने से बवासीर में आराम हो जाता है।
मूली की सब्जी बनाकर खाने से बवासीर और पेट दर्द में आराम मिलता है।
बवासीर में सूखी मूली का 20-50 मिलीलीटर सूप, पानी अथवा बकरी के मांस के सूप में मिलाकर पीने से बवासीर के रोग में आराम आता है।
125 मिलीलीटर मूली के रस में 100 ग्राम जलेबी को मिलाकर एक घंटे तक रखें। एक घंटे बाद जलेबी को खाकर रस को पी लें। इसको पीने से 1 सप्ताह में ही बवासीर का रोग ठीक हो जाता है।
मूली के छोटे-छोटे टुकड़े करके उसे देशी घी में तलकर रोजाना सुबह-शाम खाने से दोनों प्रकार की बवासीर ठीक हो जाती हैं।
सूखे हुए मूली के पत्तों का चूर्ण बनाकर उसमें मिश्री मिलाकर प्रतिदिन खाने से बवासीर ठीक होता है।
मूली का रस निकालकर इसके 20 मिलीलीटर रस में 5 ग्राम घी मिलाकर रोजाना सुबह-शाम पीने से खून का निकलना बंद हो जाता है।

दाद :-
मूली के बीजों को नींबू के रस में पीसकर गर्म करके दाद पर लगाएं। पहले दिन लगाने पर जलन व दर्द होगा, दूसरे दिन यह दर्द कम होगा। ठीक होने पर कोई कष्ट नहीं होगा। यह प्रयोग सूखी या गीली दोनों प्रकार के दाद में लाभदायक है।
मूली के बीजों को नींबू के रस में पीसकर लगाने से दाद में लाभ होता है।
शरीफे के फलों के रस में मूली के बीज को पीसकर लगाने से दाद का रोग ठीक हो जाता है।

गले के घाव :-
मूली का रस और पानी बराबर मात्रा में मिलाकर नमक डालकर गरारे करने से गले के घाव ठीक हो जाते हैं।

अग्निमान्द्य (भूख का कम लगना), अरुचि, पुरानी कब्ज, गैस :-
भोजन के साथ मूली पर नमक, कालीमिर्च डालकर 2 महीने रोजाना खाएं। पेट के रोगों में मूली की चटनी, अचार व सब्जी खाना भी उपयोगी है।

अम्लपित्त (एसिडिटीज) :-
यदि गर्मी के प्रभाव से खट्ठी डकारें आती हो तो 1 कप मूली के रस में मिश्री मिलाकर सेवन करना लाभकारी होता है।
100 मिलीलीटर मूली के रस में 10 मिलीलीटर आंवले का रस या 3 ग्राम आंवले का चूर्ण मिलाकर सुबह, दोपहर और शाम को सेवन करने से अम्लपित्त (एसिडिटिज) मे बहुत लाभ होता है।
मूली का रस और कच्चे नारियल के पानी को मिलाकर 250 मिलीलीटर की मात्रा में दिन भर में सेवन करने से अम्लपित्त (एसिडिटीज) में काफी आराम आता है।
कोमल मूली को मिश्री मिलाकर खायें या इसके पत्तों के 10-20 मिलीलीटर रस में मिश्री मिलाकर रोजाना सेवन करने से अम्लपित्त (एसिडिटीज) का रोग कम हो जाता है।
मूली के रस में चीनी मिलाकर सेवन करने से पेट की जलन, गर्मी और खट्टी डकारें आना बंद हो जाती हैं।
2 चम्मच मूली के रस में थोड़ी-सी मात्रा में मिश्री मिलाकर सेवन करने से खट्टी डकारों से छुटकारा मिल जाता है।
मूली को काटकर सेंधा नमक लगाकर खाली पेट सुबह के वक्त खाने से लाभ होता है, ध्यान रहें कि खांसी की शिकायत हो, तो मूली का इस्तेमाल बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए क्योंकि यह उस समय हानिकारक होगी।

कान का दर्द :-
मूली के पत्तों को पीसकर उसका रस निकाल लें। इसके 50 मिलीलीटर रस को मिलीलीटर ग्राम तिल के तेल में काफी देर तक पका लें। पकने पर रस पूरी तरह से जल जाये तो उस तेल को कपड़े में छानकर शीशी में भरकर रख लें। कान में दर्द होने पर इस तेल को गुनगुना करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।
2 से 4 बूंद मूली की जड़ों का रस गर्म करके कान में 2 से 3 बार डालें।

शीतपित्त :-
मूली के जूस का सेवन करने से शीतपित्त रोग ठीक हो जाता है।

घरेलु नुस्खे


1.प्याज के रस को गुनगुना करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक होता है।
2.प्रतिदिन 1 अखरोट और 10 किशमिश बच्चों को खिलाने से बिस्तर में पेशाब करने की समस्या दूर होती है।
3.टमाटर के सेवन से चिढ़चिढ़ापन और मानसिक कमजोरी दूर होती है।यह मानसिक थकान को दूर करमस्तिस्क को तंदरुस्त बनाये रखता है।इसके सेवन से दांतो व् हड्डियों की कमजोरी भी दूर होती है.
4.तुलसी के पत्तो का रस,अदरख का रस और शहद बराबर मात्रा में मिलाकर 1-1चम्मच की मात्रा में दिन में 3से4 बार सेवन करने से सर्दी,जुखाम व् खांसी दूर होती है।
5.चाय की पट्टी की जगह तेज पत्ते की चाय पीने से सर्दी, जुखाम ,छींके आनानाक बहना ,जलन व् सरदर्द में शीघ्र आराम मिलता है।
6.रोज सुबह खाली पेट हल्का गर्म पानी पीने से चेहरे में रौनक आती है वजन कम होता है, रक्त प्रवाह संतुलित रहता है और गुर्दे ठीक रहते है।
7.पांच ग्राम दालचीनी ,दो लवंग और एक चौथाई चम्मच सौंठ को पीसकर 1 लीटर पानी में उबाले जब यह 250 ग्राम रह जाए तब इसे छान कर दिन में 3 बार पीने से वायरल बुखार में आराम मिलता है।
8.पान के हरे पत्ते के आधे चम्मच रस में 2 चम्मच पानी मिलाकर रोज नाश्ते के बाद पीने सेपेट के घाव व् अल्सर में आराम मिलता है।
9.मूंग की छिलके वाली दाल को पकाकर यदि शुद्ध देशी घी में हींग-जीरे का तड़का लगाकर खाया जाए तो यह वात, पित्त, कफ तीनो दोषो को शांत करती है।
10. भोजन में प्रतिदिन 20 से 30 प्रतिशत ताजा सब्जियों का प्रयोग करने से जीर्ण रोग ठीक होता है उम्र लंबी होती है शरीर स्वस्थ रहता है।
11.भिन्डी की सब्जी खाने से पेशाब की जलन दूर होती है तथा पेशाब साफ़ और खुलकर आता है।
12.दो तीन चम्मच नमक कढ़ाई में अच्छी तरह सेक कर गर्म नमक को मोटे कपडे की पोटली में बांधकर सिकाई करने से कमर दर्द में आराम मिलता है।
13.हरी मिर्च में एंटी आक्सिडेंट होता है जो की शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता हैऔर कैंसर से लड़ने में मदद करता है इसमें विटामिन c प्रचुर मात्रा में होता है जो की प्राकृतिक प्रतिरक्षा में सुधार करता है।
14.मखाने को देसी घी में भून कर खाने से दस्तो में बहुत लाभ होता है इसके नियमित सेवन से रक्त चाप , कमर दर्द, तथा घुटने के दर्द में लाभ मिलता है।
15.अधिक गला ख़राब होने पर 5 अमरुद के पत्ते 1 गिलास पानी में उबाल कर थोड़ी देर आग पर पका ठंडा करके दिन में 4 से 5 बार गरारे करने से शीघ्र लाभ होता है।
16.आधा किलो अजवाइन को 4 लीटर पान में उबाले 2 लीटर पानी बचने पर छानकर रखे, इसे प्रतिदिन भोजन के पहले 1 कप पीने से लिवर ठीक रहता है एवशराब पीने की इच्छा नहीं होती.।
17.नीम की पत्तियो को छाया में सुखा कर पीस लें . इस चूर्ण में बराबर मात्रा में कत्थे का चूर्ण मिला ले।इस चूर्ण को मुह के छालो पर लगाकर टपकाने से छाले ठीक होते है।
18.प्रतिदिन सेब का सेवन करने से ह्रदय,मस्तिस्क तथा आमाशय को समान रूप से शक्ति मिलती है तथा शरीर की कमजोरी दूर होती है।
19.20से 25 किशमिश चीनी मिटटी के बर्तन में रात को भिगो कर रख दें।सुबह इन्हें खूब चबा कर खाने से लो ब्लड प्रेसर में लाभ मिलता है व् शरीर पुष्ट होता है।
20. अमरुद में काफी पोषक तत्व होते है .इसके नियमित सेवन से कब्ज दूर होती है और मिर्गी, टाईफाइड , और पेट के कीड़े समाप्त होते है।

काय करावे आणि काय करू नये

देवासमोर लावलेल्या समईची ज्योत  केव्हाही दक्षिणेकडे का  असू नये  ?
उत्तर :-ती यमाची मृत्यू ची दिशा आहे . यमाची पुजा केली जात नाही. फक्त दिवाळीत यम व्दितीयाला यमाचे पुजन केले जाते तेव्हा दक्षिणेला दिवा लावला जातो.

🔔 स्त्रियांनी केव्हाही तुळस का तोडू नये ?
उत्तर :- ही सौभाग्य देणारी आहे म्हणून.

🔔 देव-देवतांना वंदन करताना डोक्यावरील टोपी का काढावी ?
उत्तर :- ब्रह्मरंध्राकडे निर्गुण ईश्वरी उर्जा आकृष्ट होते व ती ग्रहण करण्यासाठी टोपी काढावी .

🔔शिवपिंडीला अर्धीच प्रदक्षिणा का घालावी

उत्तर :- शिवसुत्र आहे महादेवाचे. रद्रगण, पितृगण,लिंगाच्या टोकाला तीर्थ प्रसादासाठी बसलेले असतात .त्याना प्रदक्षिणा होईल म्हणून.

🔔 एकाच घरात दोन शिवलिंगे,
दोन शाळीग्राम,
दोन सुर्यकांत,
दोन चक्रांक, तीन देवी, गणपती व दोन शंख पूजेस का पुजू नयेत ?
उत्तर :-प्रत्येक गोष्टीत एक तत्व असते. आई बाप दोन होऊ शकत नाही एकच असतात अव्दैताची पुजा करतात, व्दैताची पुजा केली जात नाही म्हणून
🔔 गायत्री मंत्र आसनावर बसून जपावा. रस्त्यातून जाता येता किंवा गाडीत का जपू नये ?
उत्तर :-हा मंत्रराज आहे, ज्या मंत्राना बीज असतात, ते मंत्र सोवळ्यातच आसनावर करायचे असतात.  कारण चित्ताची एकाग्रता महत्वाची असते. रस्त्यातून जाता येता किंवा गाडीत जपताना ती एकाग्रता साधत नाही व शरीर दोष येतो अंतर्मुखता साधत नाही.  त्यामुळे मंत्रजपाचे फल मिळत नाही म्हणून ....

🔔 शाळीग्राम पूजावयाचे ते सम पूजावेत. मात्र समांमध्ये दोन का पुजू नयेत ?
उत्तर :- शाळीग्राम हा स्वयंभू आहे. हे विष्णूचे प्रतिक आहे व दोन पुजले तर कर्त्याला उद्वेग, कलह प्राप्त होतो म्हणून ..
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🔔 निरंजनात तुप व तेल कधीही एकत्र का घालू नये ??
उत्तर :- तूप हे सत्व तत्व व निर्गुण आहे व तेल हे रज तत्व व सगुण आहे . म्हणून हे दोन्ही एकत्र करता येत नाही . नाहीतर तम तत्व वाढेल . राक्षसी संकटे येतील म्हणून .

🔔 देवदेवतांच्या मूर्तीची वा फोटोची तोंडे कधीही दक्षिणेकडे किंवा एकमेकांसमोर का
करू नयेत ?
उत्तर:- त्यांच्या तेजाच्या लहरी स्पंदने समोर फेकली जातात त्यामुळे शत्रुत्वाचा दोष येतो म्हणून ...

🔔 विष्णूच्या मस्तकावर वाहिलेले फुल मनुष्याने आपल्या मस्तकावर का ठेवू नये ?
उत्तर :-फुले ही देवतांची पवित्रके आहेत.  विष्णुतत्त्व व चैतन्य त्या फुलात येते ते शक्तीस्वरुप होते ही शक्ती आपणास सहन होत नाही म्हणून ..

🔔 शिव मंदिरात झांज, सूर्य मंदिरात शंख व देवी मंदिरात बासरी का वाजवू नये ?

उत्तर :-शिवाचा तमभाव आहे व झांजेतुन तमतत्वाचे स्वर उत्पन्न होतात त्यामुळे शिवास विरक्ती येते म्हणून...
सर्य हा अग्नी तत्त्वाचा आहे व शंखनादही अग्नीतत्वाचा आहे दोन्हीही शक्ति एकरूप झाल्यावर रज कणाचे घर्षण होते . सुक्ष्म ज्वाळाची निर्मिती होते व त्यामुळे दाह निर्माण होतो म्हणुन...
देवी मंदिरात बासरी ही नाद पोकळी निर्माण करतो . शक्तीतत्व ह्या नादात पोकळीत रहात नाही . ती हिरण्यगर्भा आहे . ती प्रसूति वैराग्य आहे ..

🔔 आपली जपमाळ व आसन कधीही दुस-यास वापरण्यास का देवू नये ?
उत्तर:- त्यात आपल्या सेवेच्या सात्विक लहरीचे बंधन झालेले असते . ते दुस-यास दिल्यास त्याला ते मिळते व साधनेत त्या आसनावर आळस येतो .....
🔔 देवाला नेहमी करंगळी शेजारील बोटाने गंध का लावावे
उत्तर :- हाताची पाची बोटे ही त्या त्या तत्वाशी निगडीत आहेत .
अंगठा -आत्मा/
तर्जनी -पितर/
मध्यमा-स्वतः/अनामिका -देव/करंगळी -ऋषी /
म्हणून देव बोटानेच देवाला गंध लावावे...

🔔 समईत नेहमी १, ३, ५, ७ अशा विषम वाती का असाव्यात सम का असू नयेत.
उत्तर :-विषम तत्व हे तम आहे त्यामुळे आपल्याकडे येणारे तम ते विषम उसळते व सात्विक लहरी प्रस्थापित करते म्हणून......

🔔 अंगावर फाटलेला कपडा कधीही का शिवू नये.
उत्तर :-पितराना दोष लागतो म्हणून .

🔔 उंब-यावर बसून का शिंकू नये ?
उबरा हा मुळात बसण्यासाठी नाही .
तेथे सर्वतिर्थे बसतात. तिथे घराची सात्विक ऊर्जा स्तंभित असत.े शिंकेने तिला व्यास येतो त्यामुळे अपशकुन घडतो म्हणून..... घडल्यास पाणी शिंपडावे......

🔔 निजलेल्या माणसास का
ओलांडून जावू नये.
उत्तर :- झोपलेला शव असतो म्हणजे शिव असतो म्हणून ..

🔔 मांजराना प्रेत ओलांडून का देवू नये
उत्तर :- प्रेत प्रेतच राहते म्हजे पिशाच्च योनित जाते त्याला मोक्ष प्राप्ती होत नाही म्हणून ..

🔔 रात्रीच्या वेळी मीठ किंवा उडीद का आणू नयेत किंवा दुस-यास का देवू नयेत  ?
उत्तर :- याच्यात करणीतत्व आहेत. आकर्षण क्रिया पटकन होते व बळीतत्त्व आहे म्हणून ....

🔔 सायंकाळी केर का काढु नये ?
उत्तर :-  लक्ष्मीला आवडत नाही .
लक्ष्मी हळूहळू निघून जाते व अलक्ष्मीला आवडते...
🔔 रस्त्यात प्रेत दिसल्यास नेहमी नमस्कार का करावा.
उत्तर :- शव= शिव म्हणून नमस्कार करावा....

🔔 कुणाच्या घरातून परत निघताना जातो असे न म्हणता येतो असे का म्हणावे ?
उत्तर :-येणे घडते नाहीतर कायमचे जाणे होते...

🔔 एका हाताने देवाला नमस्कार का करू नये.
उत्तर :- दश इन्द्रियाचा नमस्कार मह्त्वाचा असतो . पंचतत्त्वाचा नाही ...

पृथ्वी का अमृत.. तिल का तेल.

पृथ्वी का अमृत.. तिल का तेल.
यदि इस पृथ्वी पर उपलब्ध सर्वोत्तम खाद्य पदार्थों की बात की जाए तो तिल के तेल का नाम अवश्य आएगा और यही सर्वोत्तम पदार्थ बाजार में उपलब्ध नहीं है. और ना ही आने वाली पीढ़ियों को इसके गुण पता हैं. क्योंकि नई पीढ़ी तो टी वी के इश्तिहार देख कर ही सारा सामान ख़रीदती है.
और तिल के तेल का प्रचार कंपनियाँ इसलिए नहीं करती क्योंकि इसके गुण जान लेने के बाद आप उन द्वारा बेचा जाने वाला तरल चिकना पदार्थ जिसे वह तेल कहते हैं लेना बंद कर देंगे.
तिल के तेल में इतनी ताकत होती है कि यह पत्थर को भी चीर देता है. प्रयोग करके देखें.... आप पर्वत का पत्थर लिजिए और उसमे कटोरी के जैसा खडडा बना लिजिए, उसमे पानी, दुध, धी या तेजाब संसार में कोई सा भी कैमिकल, ऐसिड डाल दीजिए, पत्थर में वैसा की वैसा ही रहेगा, कही नहीं जायेगा... लेकिन... अगर आप ने उस कटोरी नुमा पत्थर में तिल का तेल डाल दीजिए, उस खड्डे में भर दिजिये.. 2 दिन बाद आप देखेंगे कि, तिल का तेल... पत्थर के अन्दर भी प्रवेश करके, पत्थर के नीचे आ जायेगा. यह होती है तेल की ताकत, इस तेल की मालिश करने से हड्डियों को पार करता हुआ, हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है. तिल के तेल के अन्दर फास्फोरस होता है जो कि हड्डियों की मजबूती का अहम भूमिका अदा करता है.
और तिल का तेल ऐसी वस्तु है जो अगर कोई भी भारतीय चाहे तो थोड़ी सी मेहनत के बाद आसानी से प्राप्त कर सकता है. तब उसे किसी भी कंपनी का तेल खरीदने की आवश्यकता ही नही होगी. तिल खरीद लीजिए और किसी भी तेल निकालने वाले से उनका तेल निकलवा लीजिए. लेकिन सावधान तिल का तेल सिर्फ कच्ची घाणी (लकडी की बनी हुई) का ही प्रयोग करना चाहिए.
तैल शब्द की व्युत्पत्ति तिल शब्द से ही हुई है। जो तिल से निकलता वह है तैल। अर्थात तेल का असली अर्थ ही है "तिल का तेल".
तिल के तेल का सबसे बड़ा गुण यह है की यह शरीर के लिए आयुषधि का काम करता है.. चाहे आपको कोई भी रोग हो यह उससे लड़ने की क्षमता शरीर में विकसित करना आरंभ कर देता है. यह गुण इस पृथ्वी के अन्य किसी खाद्य पदार्थ में नहीं पाया जाता.
सौ ग्राम सफेद तिल 1000 मिलीग्राम कैल्शियम प्राप्त होता हैं। बादाम की अपेक्षा तिल में छः गुना से भी अधिक कैल्शियम है।
काले और लाल तिल में लौह तत्वों की भरपूर मात्रा होती है जो रक्तअल्पता के इलाज़ में कारगर साबित होती है।
तिल में उपस्थित लेसिथिन नामक रसायन कोलेस्ट्रोल के बहाव को रक्त नलिकाओं में बनाए रखने में मददगार होता है।
तिल के तेल में प्राकृतिक रूप में उपस्थित सिस्मोल एक ऐसा एंटी-ऑक्सीडेंट है जो इसे ऊँचे तापमान पर भी बहुत जल्दी खराब नहीं होने देता। आयुर्वेद चरक संहित में इसे पकाने के लिए सबसे अच्छा तेल माना गया है।
तिल में विटामिन  सी छोड़कर वे सभी आवश्यक पौष्टिक पदार्थ होते हैं जो अच्छे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं। तिल विटामिन बी और आवश्यक फैटी एसिड्स से भरपूर है।
इसमें मीथोनाइन और ट्रायप्टोफन नामक दो बहुत महत्त्वपूर्ण एमिनो एसिड्स होते हैं जो चना, मूँगफली, राजमा, चौला और सोयाबीन जैसे अधिकांश शाकाहारी खाद्य पदार्थों में नहीं होते। ट्रायोप्टोफन को शांति प्रदान करने वाला तत्व भी कहा जाता है जो गहरी नींद लाने में सक्षम है। यही त्वचा और बालों को भी स्वस्थ रखता है। मीथोनाइन लीवर को दुरुस्त रखता है और कॉलेस्ट्रोल को भी नियंत्रित रखता है।
तिलबीज स्वास्थ्यवर्द्धक वसा का बड़ा स्त्रोत है जो चयापचय को बढ़ाता है।
यह कब्ज भी नहीं होने देता।
तिलबीजों में उपस्थित पौष्टिक तत्व,जैसे-कैल्शियम और आयरन त्वचा को कांतिमय बनाए रखते हैं।
तिल में न्यूनतम सैचुरेटेड फैट होते हैं इसलिए इससे बने खाद्य पदार्थ उच्च रक्तचाप को कम करने में मदद कर सकता है।
सीधा अर्थ यह है की यदि आप नियमित रूप से स्वयं द्वारा निकलवाए हुए शुद्ध तिल के तेल का सेवन करते हैं तो आप के बीमार होने की संभावना ही ना के बराबर रह जाएगी. जब शरीर बीमार ही नही होगा तो उपचार की भी आवश्यकता नही होगी. यही तो आयुर्वेद है.. आयुर्वेद का मूल सीधांत यही है की उचित आहार विहार से ही शरीर को स्वस्थ रखिए ताकि शरीर को आयुषधि की आवश्यकता ही ना पड़े.
एक बात का ध्यान अवश्य रखिएगा की बाजार में कुछ लोग तिल के तेल के नाम पर अन्य कोई तेल बेच रहे हैं.. जिसकी पहचान करना मुश्किल होगा. ऐसे में अपने सामने निकाले हुए तेल का ही भरोसा करें. यह काम थोड़ा सा मुश्किल ज़रूर है किंतु पहली बार की मेहनत के प्रयास स्वरूप यह शुद्ध तेल आपकी पहुँच में हो जाएगा. जब चाहें जाएँ और तेल निकलवा कर ले आएँ.

तिल में मोनो-सैचुरेटेड फैटी एसिड (mono-unsaturated fatty acid) होता है जो शरीर से बैड कोलेस्ट्रोल को कम करके गुड कोलेस्ट्रोल यानि एच.डी.एल. (HDL) को बढ़ाने में मदद करता है। यह हृदय रोग, दिल का दौरा और धमनीकलाकाठिन्य (atherosclerosis) के संभावना को कम करता है।
कैंसर से सुरक्षा प्रदान करता है-
तिल में सेसमीन (sesamin) नाम का एन्टीऑक्सिडेंट (antioxidant) होता है जो कैंसर के कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने के साथ-साथ है और उसके जीवित रहने वाले रसायन के उत्पादन को भी रोकने में मदद करता है। यह फेफड़ों का कैंसर, पेट के कैंसर, ल्यूकेमिया, प्रोस्टेट कैंसर, स्तन कैंसर और अग्नाशय के कैंसर के प्रभाव को कम करने में बहुत मदद करता है।
तनाव को कम करता है-
इसमें नियासिन (niacin) नाम का विटामिन होता है जो तनाव और अवसाद को कम करने में मदद करता है।
हृदय के मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में मदद करता है-
तिल में ज़रूरी मिनरल जैसे कैल्सियम, आयरन, मैग्नेशियम, जिन्क, और सेलेनियम होता है जो हृदय के मांसपेशियों को सुचारू रूप से काम करने में मदद करता है और हृदय को नियमित अंतराल में धड़कने में मदद करता है।
शिशु के हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है-
तिल में डायटरी प्रोटीन और एमिनो एसिड होता है जो बच्चों के हड्डियों के विकसित होने में और मजबूती प्रदान करने में मदद करता है। उदाहरणस्वरूप 100ग्राम तिल में लगभग 18 ग्राम प्रोटीन होता है, जो बच्चों के विकास के लिए बहुत ज़रूरी होता है।
गर्भवती महिला और भ्रूण (foetus) को स्वस्थ रखने में मदद करता है-
तिल में फोलिक एसिड होता है जो गर्भवती महिला और भ्रूण के विकास और स्वस्थ रखने में मदद करता है।
शिशुओं के लिए तेल मालिश के रूप में काम करता है-
अध्ययन के अनुसार तिल के तेल से शिशुओं को मालिश करने पर उनकी मांसपेशियाँ सख्त होती है साथ ही उनका अच्छा विकास होता है। आयुर्वेद के अनुसार इस तेल से मालिश करने पर शिशु आराम से सोते हैं।
अस्थि-सुषिरता (osteoporosis) से लड़ने में मदद करता है-
तिल में जिन्क और कैल्सियम होता है जो अस्थि-सुषिरता से संभावना को कम करने में मदद करता है।
मधुमेह के दवाईयों को प्रभावकारी बनाता है-
डिपार्टमेंट ऑफ बायोथेक्सनॉलॉजी विनायक मिशन यूनवर्सिटी, तमिलनाडु (Department of Biothechnology at the Vinayaka Missions University, Tamil Nadu) के अध्ययन के अनुसार यह उच्च रक्तचाप को कम करने के साथ-साथ इसका एन्टी ग्लिसेमिक प्रभाव रक्त में ग्लूकोज़ के स्तर को 36% कम करने में मदद करता है जब यह मधुमेह विरोधी दवा ग्लिबेक्लेमाइड (glibenclamide) से मिलकर काम करता है। इसलिए टाइप-2 मधुमेह (type 2 diabetic) रोगी के लिए यह मददगार साबित होता है।
दूध के तुलना में तिल में तीन गुना कैल्शियम रहता है। इसमें कैल्शियम, विटामिन बी और ई, आयरन और ज़िंक, प्रोटीन की भरपूर मात्रा रहती है और कोलेस्टरोल बिल्कुल नहीं रहता है। तिल का तेल ऐसा तेल है, जो सालों तक खराब नहीं होता है, यहाँ तक कि गर्मी के दिनों में भी वैसा की वैसा ही रहता है.
तिल का तेल कोई साधारण तेल नहीं है। इसकी मालिश से शरीर काफी आराम मिलता है। यहां तक कि लकवा जैसे रोगों तक को ठीक करने की क्षमता रखता है। इससे अगर आप महिलाएं अपने स्तन के नीचे से ऊपर की ओर मालिश करें, तो स्तन पुष्ट होते हैं। सर्दी के मौसम में इस तेल से शरीर की मालिश करें, तो ठंड का एहसास नहीं होता। इससे चेहरे की मालिश भी कर सकते हैं। चेहरे की सुंदरता एवं कोमलता बनाये रखेगा। यह सूखी त्वचा के लिए उपयोगी है।
 तिल का तेल- तिल विटामिन ए व ई से भरपूर होता है। इस कारण इसका तेल भी इतना ही महत्व रखता है। इसे हल्का गरम कर त्वचा पर मालिश करने से निखार आता है। अगर बालों में लगाते हैं, तो बालों में निखार आता है, लंबे होते हैं।
जोड़ों का दर्द हो, तो तिल के तेल में थोड़ी सी सोंठ पावडर, एक चुटकी हींग पावडर डाल कर गर्म कर मालिश करें। तिल का तेल खाने में भी उतना ही पौष्टिक है विशेषकर पुरुषों के लिए।इससे मर्दानगी की ताकत मिलती है!
हमारे धर्म में भी तिल के बिना कोई कार्य सिद्ध नहीं होता है, जन्म, मरण, परण, यज्ञ, जप, तप, पित्र, पूजन आदि में तिल और तिल का तेल के बिना संभव नहीं है अतः इस पृथ्वी के अमृत को अपनावे और जीवन निरोग बनावे.🙏

चूना : बीमारी में अमृत

चूना : बीमारी में अमृत ☀
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🔶  "चूना" जो अकसर पान में खाया जाता है, वह सौ में से सत्तर बिमारियों को ठीक कर देता है । गेहूँ के दाने के समान सुबह खाली पेट चूना खाओ । उस समय यह अमृत के समान है । इसी प्रकार गेहूँ के दाने के बराबर चूना गन्ने के रस में मिलाकर पी लेने से बहुत जल्दी पीलिया ठीक हो जाता है ।

🔶  यही नहीं चूना नपुंसकता की सबसे अच्छी दवा है । अगर किसी के शुक्राणु नहीं बनते हों तो उसको अगर गन्ने के रस के साथ चूना पिलाया जाये तो साल, डेढ़ साल में भरपूर शुक्राणु बनने लगेंगे और जिन माताओं के शरीर में अण्डे नहीं बनते, उनकी बहुत अच्छी दवा चूना है ।

🔶  विद्यार्थियों के लिए चूना बहुत लाभदायक है । लम्बाई बढाने के लिए गेहूँ के दाने के बराबर चूना रोज दही में मिलाकर खाना चाहिए । दही नहीं हो तो दाल में मिलाकर खाओ । दाल नहीं है तो पानी में मिलाकर पिओ । इससे लम्बाई बढने के साथ-साथ स्मरण शक्ति भी बहुत अच्छी होती है ।

🔶  जिन बच्चों की बुद्धि कम काम करती है, जो मतिमंद बच्चे हैं, उनकी सबसे अच्छी दवा यह चूना है । जिन बच्चों में बुद्धि कम है, दिमाग देर में काम करता है, देर में सोचते हैं, जिनकी हर चीज स्लो है, यदि उन सभी बच्चों को चूना खिलाया जाये तो वे अच्छे हो जायेंगे ।

🔶  महिलाओं को अपने मासिक धर्म के समय अगर कुछ भी तकलीफ होती है तो उसकी सबसे अच्छी दवा चूना है । जो माताएं, जिनकी उम्र पचास वर्ष हो गयी है और उनका मासिक धर्म बन्द हो गया हो, उनकी सबसे अच्छी दवा चूना है । वे गेहूँ के दाने के बराबर चूना प्रतिदिन दाल में, लस्सी में, नहीं तो पानी में घोलकर पियें, फायदा होगा ।

🔶  यदि कोई महिला गर्भावस्था में है तो उसे हर रोज चूना खाना चाहिए । क्योंकि गर्भवती माता को सबसे ज्यादा केल्शियम की जरुरत होती है और चूना केल्शियम का सबसे बड़ा भण्डार है । एक कप अनार के रस में गेहूँ के दाने के बराबर चूना मिलाकर गर्भवती महिला को नौ महीने तक लगातार हर रोज पिलायें । इससे चार फायदे होंगे  -

🔸पहला फायदा  :  माँ को बच्चे के जन्म के समय कोई तकलीफ नहीं होगी और नॉर्मल डीलिवरी होगी ।

🔸दूसरा फायदा  :  जो बच्चा पैदा होगा, वो बहुत हृष्ट-पुष्ट और तन्दरुस्त होगा ।

🔸तीसरा फ़ायदा  :  जिस बच्चे की माँ ने गर्भावस्था के समय चूना खाया हो, वह बच्चा जिन्दगी में जल्दी बीमार नहीं होगा ।

🔸चौथा फायदा विशेष लाभदायक है  :  पैदा होने वाला बच्चा बहुत होशियार होगा ।

🔶  चूना घुटने का दर्द ठीक करता है । कमर का दर्द ठीक करता है । कंधे का दर्द ठीक करता है । एक खतरनाक बीमारी है, Spondylitis वो चूना खाने से ठीक हो जाती है । कई बार हमारी रीढ़ की हड्डी में जो मनके होते हैं, उसमें दूरी बढ़ जाती है, एक-दूसरे मनके में फासला आ जाता है, जो चूना खाने से ठीक हो सकता है । यही नहीं, रीड़ की हड्डी की सब बिमारियाँ चूना खाने से ठीक हो सकती हैं । यदि आपकी हड्डी टूट जाये तो भी टूटी हुई हड्डी को जोड़ने की ताकत सबसे ज्यादा चूने में है ।

🔶  मुँह में ठण्डा-गर्म पानी लगता है तो चूना खाओ, बिलकुल ठीक हो जाता है । मुँह में अगर छाले हो गए हों तो चूने का पानी पियो, तुरन्त ठीक हो जाता है ।

🔶  शरीर में जब खून कम हो जाये तो चूना जरुर लेना चाहिए । एनीमिया हो, खून की कमी हो, उसकी सबसे अच्छी दवा है - चूना । चूना पीते रहो - गन्ने के रस में, संतरे के रस में, नहीं तो सबसे अच्छा है अनार के रस में । अनार के रस में चूना पियें, बहुत जल्दी खून बनता है । एक कप अनार का रस और गेहूँ के दाने के बराबर चूना सुबह खाली पेट पियें ।

🔶  भारत के लोग पान में चूना खाते हैं, यह अच्छी बात है । लेकिन यदि उस पान में तम्बाकू खा रहे हैं, फिर तो समझो वे ज़हर ही खा रहे हैं । तम्बाकू ज़हर है और चूना अमृत है । इसलिए पान में चूना खाइए, लेकिन तम्बाकू मत खाइए । और यह भी ध्यान रहे कि पान में चूना लगाकर खाइये, परन्तु उसमें कत्था मत लगाइये, कत्था केन्सर पैदा करता है ।

🔶  पान में चूना डालिये, सोंठ डालिये, इलाइची डालिये, लौंग डालिये, केशर डालिये । ये सब डालिये । लेकिन पान में तम्बाकू, सुपारी और कत्था मत डालिये ।

🔶  घुटने में घिसाव आ गया हो और डॉक्टर कहे कि घुटना बदल दो तो भी जरुरत नहीं, चूना खाते रहिये और हरसिंगार के पत्ते का काढ़ा लीजिए, घुटने बहुत अच्छे काम करने लग जायेंगे ।

हिंदी एक वैज्ञानिक भाषा है

हिंदी एक वैज्ञानिक भाषा है
और कोई भी अक्षर वैसा क्यूँ है
उसके पीछे कुछ कारण है ,
अंग्रेजी भाषा में ये
बात देखने में नहीं आती |
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क, ख, ग, घ, ङ- कंठव्य कहे गए,
 क्योंकि इनके उच्चारण के समय
ध्वनि
कंठ से निकलती है।
एक बार बोल कर देखिये |

च, छ, ज, झ,ञ- तालव्य कहे गए,
क्योंकि इनके उच्चारण के
समय जीभ
तालू से लगती है।
एक बार बोल कर देखिये |

ट, ठ, ड, ढ , ण- मूर्धन्य कहे गए,
क्योंकि इनका उच्चारण जीभ के
मूर्धा से लगने पर ही सम्भव है।
एक बार बोल कर देखिये |


त, थ, द, ध, न- दंतीय कहे गए,
क्योंकि इनके उच्चारण के
समय
जीभ दांतों से लगती है।
एक बार बोल कर देखिये |

प, फ, ब, भ, म,- ओष्ठ्य कहे गए,
क्योंकि इनका उच्चारण ओठों के
मिलने
पर ही होता है। एक बार बोल
कर देखिये ।
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हम अपनी भाषा पर गर्व
करते हैं ये सही है परन्तु लोगो को
इसका कारण भी बताईये |
इतनी वैज्ञानिकता
दुनिया की किसी भाषा मे
नही है
जय हिन्द
क,ख,ग क्या कहता है जरा गौर करें....
••••••••••••••••••••••••••••••••••••
क - क्लेश मत करो
ख- खराब मत करो
ग- गर्व ना करो
घ- घमण्ड मत करो
च- चिँता मत करो
छ- छल-कपट मत करो
ज- जवाबदारी निभाओ
झ- झूठ मत बोलो
ट- टिप्पणी मत करो
ठ- ठगो मत
ड- डरपोक मत बनो
ढ- ढोंग ना करो
त- तैश मे मत रहो
थ- थको मत
द- दिलदार बनो
ध- धोखा मत करो
न- नम्र बनो
प- पाप मत करो
फ- फालतू काम मत करो
ब- बिगाङ मत करो
भ- भावुक बनो
म- मधुर बनो
य- यशश्वी बनो
र- रोओ मत
ल- लोभ मत करो
व- वैर मत करो
श- शत्रुता मत करो
ष- षटकोण की तरह स्थिर रहो
स- सच बोलो
ह- हँसमुख रहो
क्ष- क्षमा करो
त्र- त्रास मत करो
ज्ञ- ज्ञानी बनो !!

कृपया इस ज्ञान की जानकारी सभी को अग्र प्रेषित करें

सर्दियों के लिए बल व पुष्टि का खजाना

🌷सर्दियों के लिए बल व पुष्टि का खजाना🌷
🔶 Ø रात को भिगोयी हुई १ चम्मच उड़द की डाल सुबह महीन पीसकर उसमें २ चम्मच शुद्ध शहद मिला के चाटें | १ - १.३० घंटे बाद मिश्रीयुक्त दूध पियें | पूरी सर्दी यह प्रयोग करने से शरीर बलिष्ठ और सुडौल बनता है तथा वीर्य की वृद्धि होती है |
🔶 Ø दूध के साथ शतावरी का २ – ३ ग्राम चूर्ण लेने से दुबले-पतले व्यक्ति, विशेषत: महिलाएँ कुछ ही दिनों में पुष्ट जो जाती हैं | यह चूर्ण स्नायु संस्थान को भी शक्ति देता हैं |
🔶 Ø रात को भिगोयी हुई ५ – ७ खजूर सुबह खाकर दूध पीना या सिंघाड़े का देशी घी में बना हलवा खाना शरीर के लिए पुष्टिकारक है |
🔶 Ø रोज रात को सोते समय भुनी हुई सौंफ खाकर पानी पीने से दिमाग तथा आँखों की कमजोरी में लाभ होता है |
🔶 Ø आँवला चूर्ण, घी तथा शहद समान मात्रा में मिलाकर रख लें | रोज सुबह एक चम्मच खाने से शरीर के बल, नेत्रज्योति, वीर्य तथा कांति में वृद्धि होती है | हड्डियाँ मजबूत बनती हैं |
🔶 Ø १०० ग्राम अश्वगंधा चूर्ण को २० ग्राम घी में मिलाकर मिट्टी के पात्र में रख दें | सुबह ३ ग्राम चूर्ण दूध के साथ नियमित लेने से कुछ ही दिनों में बल-वीर्य की वृद्धि होकर शरीर हृष्ट-पुष्ट बनता है |
🔶 Ø शक्तिवर्धक खीर : ३ चम्मच गेहूँ का दलिया व २ चम्मच खसखस रात को पानी में भिगो दें | प्रात: इसमें दूध और मिश्री डालकर पकायें | आवश्यकता अनुसार मात्रा घटा-बढ़ा सकते हैं | यह खीर शक्तिवर्धक है |
🔶 Ø हड्डी जोडनेवाला हलवा : गेहूँ के आटे में गुड व ५ ग्राम बला चूर्ण डाल के बनाया गया हलवा (शीरा) खाने से टूटी हुई हड्डी शीघ्र जुड़ जाति है | दर्द में भी आराम होता है |
🔶 Ø सर्दियों में हरी अथवा सुखी मेथी का सेवन करने से शरीर के ८० प्रकार के वायु-रोगों में लाभ होता है |
 🔶 Ø सब प्रकार के उदर-रोगों में मठ्ठे और देशी गाय के मूत्र का सेवन अति लाभदायक है | (गोमूत्र न मिल पाये तो गोझरण अर्क का उपयोग कर सकते हैं |)

प्लेटलेट्स म्हणजे काय

प्लेटलेट्स म्हणजे काय?’⚡

हा प्रश्न अनेकांना पडला असेल.
त्या प्रश्नाचं उत्तर या लेखात मिळेल.

हिमोग्लोबिन,
प्लाझ्माप्रमाणे
प्लेटलेट्स हादेखील रक्तातील एक महत्त्वाचा घटक आहे.
रक्त पातळ होऊ न देण्याचं तसंच
रक्तवाहिन्यांना इजा झाल्यास रक्तस्त्राव अधिक प्रमाणात होऊ न देण्याचं काम या ‘प्लेटलेट्स’ करतात.

या प्लेटलेट्स मुळातच
एखाद्या प्लेटप्रमाणे दिसतात.
त्यामुळे त्यांना ‘प्लेटलेट्स’ हे नाव शास्त्रज्ञांनी दिलं आहे.
या पेशींसाठी वैद्यकीय भाषेत ‘थ्रोम्बोसाइट्स’
ही संज्ञा वापरली आहे.

रक्तामध्ये प्रामुख्याने तीन पेशी असतात.
लालपेशी (आरबीसी),
पांढऱ्या पेशी (डब्लूबीसी)
आणि
प्लेटलेट्स (तंतुकणिका).
त्यापैकी रक्तामध्ये ‘प्लेटलेट्स’ची संख्या सर्वाधिक असते.
प्लेटलेट्स या मोठया हाडांतील
रक्तमज्जेत (रेड बोनमॅरो) असणाऱ्या
मेगा कॅरोसाइट्स या पेशींपासून तयार होतात.
त्यांचं रक्तातील आयुष्य सर्वसाधारणपणे 5-9 दिवसांचं असतं.
जुन्या झालेल्या प्लेटलेट्स प्लीहा (स्टीन) आणि यकृत (लिव्हर) या मध्ये नाश पावतात.

⚡प्लेटलेट्सचं कार्य⚡

रक्तवाहिन्यांतून वाहणारं रक्त हे प्रवाही राहणं महत्त्वाचं असतं.
ऑक्सिजन वहनाचं प्रमुख कार्य रक्तातून होतं.
तसंच रक्त शरीरातील विभिन्न अवयवांचे पेशीस्तरांवर पोषण करते.
एखादी जखम झाल्यास रक्तवाहिन्यांमधून रक्त अधिक प्रमाणात वाहून गेल्यास जीवितहानीदेखील होऊ शकते.

अशा वेळेस जखम झालेल्या ठिकाणी प्लेटलेट्स आणि फायबर एकत्र येऊन रक्तप्रवाह खंडित करण्याचं काम करतात.
त्यामुळेच प्लेटलेट्सना
‘मानवी शरीराची कवचकुंडलं’ म्हटलं जातं.

⚡प्लेटलेट्सची संख्या ⚡

सर्वसाधारणपणे मानवी शरीरातील प्लेटलेट्सची संख्या दीड ते साडेचार लाख इतकी असते.

संख्या प्रमाणापेक्षा अधिक झाल्यास रक्ताची गुठळी होऊन,
रक्तवाहिन्यांतील रक्तप्रवाहाला अडथळा निर्माण होऊ शकतो.
त्यामुळे हृदयरोग, स्ट्रोक यांसारखे आजार होतात.
हातापायाच्या रक्तवाहिन्यांमध्ये अडथळा निर्माण झाल्यास,
शरीराचा तो भाग बधीर होऊन निकामी होऊ शकतो.

संख्या प्रमाणापेक्षा कमी झाल्यास रक्तस्त्राव अधिक होतो.
म्हणजे नाकातून, हिरडयांमधून, थुंकीतून रक्त पडतं.
त्वचेवर लालसर ठिपके येतात. मासिक रज:स्रव अधिक प्रमाणात होतो.
जखम झाल्यास रक्तस्रव आटोक्यात येत नाही.
जास्त रक्त गेल्याने थकवा येतो.

⚡प्लेटलेट्स कमी होण्याची कारणं

•    डेंग्यू, मलेरियाचा ताप
•    अनुवंशिक आजार
•    केमोथेरपी

⚡संख्या कमी झाल्यास...

डेंग्यू, मलेरिया या साथीच्या तापात प्लेटलेट्सची संख्या अचानक कमी होऊ शकते.
त्यामुळे 2-3 दिवसांचा ताप आल्यास,
त्या त्या रोगांची लक्षणे दिसल्यास वैद्यकीय सल्ल्याने त्वरित रक्ततपासणी (सीबीसी टेस्ट) करून घ्यावी. त्यानुसारच उपाययोजना करावी.

⚡प्लेटलेट्सची संख्या कमी झाल्यास लक्षात ठेवायच्या गोष्टी :

•    लसूण खाऊ नये.
•    अधिक श्रमाचे व्यायाम तसंच दगदग करु नये.
•    अ‍ॅस्प्रिन, कोल्डडॅगसारखी औषधे घेऊ नयेत.
•    दात घासताना ब्रश लागणार नाही, याची दक्षता घ्यावी.
•    सु-या, कातरी वापरताना काळजीने वापरावे.
•    बद्धकोष्ठता होणार नाही, याची काळजी घ्यावी.
•    त्वरित डॉक्टरांचा सल्ला घ्यावा.

प्लेटलेट्स कमी झाल्यास,
त्या बाहेरून घ्याव्या लागतात. इतर कुठलेही उपाय अजून खात्रीशीररीत्या सिद्ध झालेले नाहीत.
प्लेटलेट्ससाठी गोळया किंवा औषधंही नाहीत.
पौष्टिक आहारातूनच प्लेटलेट्सचं प्रमाण नियंत्रणात ठेवता येतं.
                                      
 ⚡नैसर्गिकरीत्या ब्लड प्लेटलेट्स वाढवण्यात मदत करतील हे 7 पदार्थ .

जर तुम्ही शरीरात कमी होत चाललेल्या प्लेटलेट्समुळे चिंताग्रस्त असाल तर घाबरू नका कारण तुम्ही तुमचा आहारात काही पदार्थांचा समावेश करून ब्लड प्लेटलेट्स नैसर्गिक पद्धतीने वाढवू शकता.

शरीरात प्‍लेटलेट्सची संख्या कमी होण्याच्या स्थितीला थ्रोम्बोसायटोपेनिया नावाने ओळखले जाते. या निरोगी व्यक्तीच्या शरीरात सामान्य प्लेटलेट काउंट 150 हजार ते 450 हजार प्रती मायक्रोलीटर असतो. परंतु जेव्हा हा काउंट 150 हजार प्रती मायक्रोलीटरपेक्षा खाली येतो तेव्हा याला लो प्लेटलेट मानले जाते. काही विशिष्ठ प्रकरच्या औषधी, अनुवांशिक रोग, कँसर, केमोथेरपी ट्रीटमेंट, अल्कोहलचे जास्त सेवन आणि काही विशिष्ठ प्रकारचे आजार उदा. डेंग्यू, मलेरिया, चिकनगुण्या झाल्यानंतर ब्लड प्लेटलेट्सची संख्या कमी होते.

पुढे जाणून घ्या, नैसर्गिक पद्धतीने प्लेटलेट्स वाढण्व्यासाठी आहारात कोणत्या पदार्थांचा समावेश करावा....

⚡१.पपई -⚡

पपईचे फळ आणि झाडाची पानं दोन्हींचा उपयोग कमी असलेल्या प्लेटलेट्स थोड्याच दिवसात वाढवण्यास मदत करते. 2009 मध्ये मलेशिया येथे वैज्ञानिकांनी केलेल्या एका सर्व्हेमध्ये आढळून आले की, डेंग्यू आजारात रक्तातील कमी होणाऱ्या प्लेटलेटची संख्या पपई पानांच्या रसाचे सेवन केल्याने वाढू शकते. पपईचे पानं तुम्ही चहाप्रमाणे पाण्यात उकळून घेऊ शकता. याची चव ग्रीन टी प्रमाणे असते.

⚡२.गुळवेल⚡

गुळवेलचे ज्यूस ब्लड प्लेटलेट वाढवण्यामध्ये महत्त्वाची भूमिका पार पडते. डेंग्यू झालेल्या रुग्णाने याचे सेवन प्लेटलेट्स वाढवण्यासाठी कर्वे तसेच यामुळे रोगप्रतिकारकशक्ती वाढते. दोन चमचे गुळवेल सत्व एक चमचा मधासोबत दिवसातून दोन वेळेस घ्यावे किंवा गुळवेलची काडी रात्रभर पाण्यात भिजवून ठेवावी आणि सकाळी उठल्यानंतर हे पाणी गाळून प्यावे. या उपायाने ब्लड प्लेटलेट वाढण्यास मदत होईल. गुळवेल सत्व आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोअरवर सहजपणे उपलब्ध होते.

⚡३.आवळा⚡

प्लेटलेट्स वाढवण्यासाठी आवळा लोकप्रिय आयुर्वेदिक उपचार आहे. आवळ्यामध्ये भरपूर प्रमाणात उपलब्ध असलेले व्हिटॅमिन 'सी' प्लेटलेट्स वाढवण्याचे आणि तुम्ही प्रतिकारशक्ती मजबूत करण्यास मदत करते. दररोज सकाळी नियमितपणे रिकाम्या पोटी 3-4 आवळे खावेत. दोन चमचे आवळ्याच्या ज्यूसमध्ये मध टाकून तुम्ही हे मिश्रण घेऊ शकता.

⚡४.भोपळा⚡

भोपळा कमी प्लेटलेट कांउटमध्ये सुधार करणारा उपयुक्त आहार आ
हे. भोपळा व्हिटॅमिन 'ए' ने समृद्ध असल्यामुळे प्लेटलेटचा योग्य विकास होण्यास मदत करतो. हा कोशिकांमध्ये उत्पन्न होणाऱ्या प्रोटीनला नियंत्रित करतो. यामुळे प्लेटलेट्सचा स्तर वाढवण्यास मदत होते. भोपळ्याच्या अर्धा ग्लास ज्यूसमध्ये दोन चमचे मध टाकून दिवसातून दोन वेळेस घेतल्यास रक्तातील प्लेटलेट्सची संख्या वाढते.

⚡५.पालक⚡

पालक व्हिटॅमिन 'के'चा चांगला स्रोत असून अनेकवेळा कमी प्लेटलेट विकाराच्या उपचारामध्ये याचा उपयोग केला जातो. व्हिटॅमिन 'के' योग्य पद्धतीने होणाऱ्या ब्लड क्‍लॉटिंगसाठी आवश्यक आहे. अशाप्रकारे पालक जास्त प्रमाणात होणाऱ्या ब्लीडींगचा धोका कमी करण्यात सहाय्यक ठरतो. दोन कप पाण्यामध्ये 4  ते 5 पालकाची ताजी पानं थोडावेळ उकळून घ्या. त्यानंतर हे पाणी थंड झाल्यानंतर यामध्ये अर्धा ग्लास टोमॅटोचा रस मिसळा. हे मिश्रण दिवसातून दोन ते तीन वेळेस घ्या. या व्यतिरिक्त तुम्ही पालकाचे सेवन सलाड, सूप, भाजी स्वरुपात करू शकता.

⚡६.नारळ पाणी⚡

शरीरात ब्लड प्लेटलेट वाढवण्यात नारळ पाणी खूप सहाय्यक ठरते. नारळ पाण्यामध्ये इलेक्ट्रोलाइट्स भरपूर प्रमाणात असतात. या व्यतिरिक्त हे पाणी मिनरलचा उत्तम स्रोत आहे. हे शरीरातील ब्लड प्लेटलेट्सची कमतरता भरून काढण्यास उपयुक्त आहे.

⚡७.बीट ⚡

बीटचे सेवन प्लेटलेट वाढवणार सर्वात लोकप्रिय आहार आहे. नैसर्गिक अँटीऑक्‍सीडेंट आणि हेमोस्टॅटिक गुणांनी भरपूर असल्यामुळे, बीट प्लेटलेट काउंट थोड्याच दिवसात वाढवण्याचे काम करते. दोन ते तीन चमचे बीट रस एक ग्लास गाजराच्या रसामध्ये मिसळून घेतल्यास ब्लड प्लेटलेट्सची संख्या जलद गतीने वाढते. यामध्ये उपलब्ध असलेल्या अँटीऑक्‍सीडेंट गुणामुळे शरीरातील रोगप्रतिकारकशक्ती वाढते.

कोलस्ट्रोल हार्ट अटैक

भारत मैं सबसे ज्यादा मौते कोलस्ट्रोल बढ़ने के कारण हार्ट अटैक से होती हैं।
अदरक (ginger juice) -
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यह खून को पतला करता है।
यह दर्द को प्राकृतिक तरीके से 90% तक कम करता हें।
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लहसुन (garlic juice)
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इसमें मौजूद allicin तत्व cholesterol व BP को कम करता है।
वह हार्ट ब्लॉकेज को खोलता है।
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नींबू (lemon juice)
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इसमें मौजूद antioxidants, vitamin C व potassium खून को साफ़ करते हैं।
ये रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity) बढ़ाते हैं।
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एप्पल साइडर सिरका ( apple cider vinegar)
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इसमें 90 प्रकार के तत्व हैं जो शरीर की सारी नसों को खोलते है, पेट साफ़ करते हैं व थकान को मिटाते हैं।
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         इन देशी दवाओं को
       इस तरह उपयोग में लेवें
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1-एक कप नींबू का रस लें;
2-एक कप अदरक का रस लें; 
3-एक कप लहसुन का रस लें;
4-एक कप एप्पल का सिरका लें;
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चारों को मिला कर धीमीं आंच पर गरम करें जब 3 कप रह जाए तो उसे ठण्डा कर लें;
अब आप
उसमें 3 कप शहद मिला लें
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रोज इस दवा के 3 चम्मच सुबह खाली पेट लें जिससे
सारी ब्लॉकेज खत्म हो जाएंगी।
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आप सभी से हाथ जोड़ कर विनती है कि इस मैसेज को ज्यादा से ज्यादा प्रसारित करें ताकि सभी इस दवा से अपना इलाज कर  सकें ; धन्यवाद् !
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जरा सोचिये की शाम के
7:25 बजे है और आप घर जा रहे है वो भी एकदम अकेले।
ऐसे में अचानक से आपके सीने में तेज दर्द होता है जो आपके हाथों से होता हुआ आपके
जबड़ो तक पहुँच जाता है।
आप अपने घर से सबसे नजदीक अस्पताल से 5 मील दूर है और दुर्भाग्यवश आपको ये नहीं समझ आ रहा की आप वहांतक पहुँच पाएंगे की नहीं।
आप सीपीआर में प्रशिक्षित है मगर वहां भी आपको ये नहीं सिखाया गया की इसको खुद पर प्रयोग कैसे करे।
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     ऐसे में दिल के दौरे से बचने
            के लिए ये उपाय
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चूँकि ज्यादातर लोग दिल के दौरे के वक्त अकेले होते है बिना किसी की मदद के उन्हें सांस लेने में तकलीफ
होती है । वे बेहोश होने लगते है और उनके पास सिर्फ 10 सेकण्ड्स होते है ।
ऐसे हालत में पीड़ित जोर जोर से खांस कर खुद को सामान्य रख सकता है। एक जोर की सांस
लेनी चाहिए हर खांसी से पहले
और खांसी इतनी तेज हो की
छाती से थूक निकले।
जब तक मदद न आये ये
प्रक्रिया दो सेकंड से दोहराई
जाए ताकि धड्कण सामान्य
हो जाए ।
जोर की साँसे फेफड़ो में
ऑक्सीजन पैदा करती है
और जोर की खांसी की वजह
से दिल सिकुड़ता है जिस से
रक्त सञ्चालन नियमित रूप से
चलता है ।
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अधिकांश रोगों की जड पेट का साफ़ न रहना है

अधिकांश रोगों की जड पेट का साफ़ न रहना है।पेट और आँतों को साफ़ करने की अनेक औषधियां है लेकिन उनके गुण धर्म समझ के ही प्रयोग करना उचित है। अनुलोमन स्त्रंसन भेदन विरेचन वामन शोधक छेदन लेखन आदि उनकी क्रिया भेद है।
जो द्रव्य अपक्व मल को पका कर अधोमार्ग से निकाल दे उसे अनुलोमन कहते हैं।हर्ड इसी श्रेणी में है।
जो द्रव्य अपक्व मल को बिना पकाये निकाल फेंके वो संत्रस्न कहलाता है।यथा--अमलतास का गूदा।
जो द्रव्य मल को भेद के निकाल दे वो भेदन कहलाता है।कुटकी इसका अच्छा उदाहरण है।
जो द्रव्य अपक्व और पक्व मल को पतला कर के बाहर अधोमार्ग द्वारा निकाल दे वो विरेचन कहलाता है।त्रिवृता दन्ती और इन्द्रायण मूल इसी श्रेणी में है।
जो द्रव्य कच्चे ही पित्त कफ अन्न आदि को उलटी द्वारा निकाले वो वामक है।मैनफल इसी श्रेणी में है।
देह में सञ्चित मलों को अपने स्थान से हटा कर मुख या अधोमार्ग द्वारा बाहर निकालने वाला शोधक कहलाता है।देवदाली का फल इसी श्रेणी में आता है।
जो द्रव्य शरीर में चिपके हुए कफ आदि दोषों को बलात् उखाड़ फेंकता है उसे छेदन कहते है।काली मिर्च शिलाजीत आदि इसका उदाहरण है।
इन सब बातों को ध्यान में रख कर ही उपचार लेना चाहिये।

ठंड में जरूर खाएं, ये 8 चीजें, इनसे मिलती है शरीर को गर्मी

ठंड में जरूर खाएं 🌷

👉🏻 ये 8 चीजें, इनसे मिलती है शरीर को गर्मी

🔥 ठंड के मौसम में सर्दी के असर से बचने के लिए लोग गर्म कपड़ों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन शरीर को चाहे कितने ही गर्म कपड़ों से ढक लिया जाए ठंड से लड़ने के लिए बॉडी में अंदरूनी गर्मी होनी चाहिए। शरीर में यदि अंदर से खुद को मौसम के हिसाब से ढालने की क्षमता हो तो ठंड कम लगेगी और कई बीमारियां भी नहीं होंगी। यही कारण है कि ठंड में खानपान पर विशेष रूप से ध्यान देने को आयुर्वेद में बहुत महत्व दिया गया है। सर्दियों में यदि खानपान पर विशेष ध्यान दिया जाए तो शरीर संतुलित रहता है और सर्दी कम लगती है।

🔵 आज हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसी ही चीजों के बारे में जानिए कुछ ऐसे ही खाने की चीजों के बारे में

🔶 1. बाजरा
कुछ अनाज शरीर को सबसे ज्यादा गर्मी देते है। बाजरा एक ऐसा ही अनाज है। सर्दी के दिनों में बाजरे की रोटी बनाकर खाएं। छोटे बच्चों को बाजरा की रोटी जरूर खाना चाहिए। इसमें कई स्वास्थ्यवर्धक गुण भी होते है। दूसरे अनाजों की अपेक्षा बाजरा में सबसे ज्यादा प्रोटीन की मात्रा होती है। इसमें वह सभी गुण होते हैं, जिससे स्वास्थ्य ठीक रहता है। ग्रामीण इलाकों में बाजरा से बनी रोटी व टिक्की को सबसे ज्यादा जाड़ो में पसंद किया जाता है। बाजरा में शरीर के लिए आवश्यक तत्व जैसे मैग्नीशियम,कैल्शियम,मैग्नीज, ट्रिप्टोफेन, फाइबर, विटामिन- बी, एंटीऑक्सीडेंट आदि भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।

🔶 2. बादाम
बादाम कई गुणों से भरपूर होते हैं। इसका नियमित सेवन अनेक बीमारियों से बचाव में मददगार है।अक्सर माना जाता है कि बादाम खाने से याददाश्त बढ़ती है, लेकिन यह ड्राय फ्रूट अन्य कई रोगों से हमारी रक्षा भी करता है। इसके सेवन से कब्ज की समस्या दूर हो जाती है, जो सर्दियों में सबसे बड़ी दिक्कत होती है। बादाम में डायबिटीज को निंयत्रित करने का गुण होता है। इसमें विटामिन - ई भरपूर मात्रा में होता है।

🔶 3. अदरक
क्या आप जानते हैं कि रोजाना के खाने में अदरक शामिल कर बहुत सी छोटी-बड़ी बीमारियों से बचा जा सकता है। सर्दियों में इसका किसी भी तरह से सेवन करने पर बहुत लाभ मिलता हैै। इससे शरीर को गर्मी मिलती है और डाइजेशन भी सही रहता है।

🔶 4. शहद
शरीर को स्वस्थ, निरोग और उर्जावान बनाए रखने के लिए शहद को आयुर्वेद में अमृत भी कहा गया है। यूं तो सभी मौसमों में शहद का सेवन लाभकारी है, लेकिन सर्दियों में तो शहद का उपयोग विशेष लाभकारी होता है। इन दिनों में अपने भोजन में शहद को जरूर शामिल करें। इससे पाचन क्रिया में सुधार होगा और इम्यून सिस्टम पर भी असर पड़ेगा।

🔶 5. रसीले फल न खाएं
सर्दियों के दिनों में रसीले फलों का सेवन न करें। संतरा, रसभरी या मौसमी आपके शरीर को ठंडक देते है। जिससे आपको सर्दी या जुकाम जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

🔶 6. मूंगफली
100 ग्राम मूंगफली के भीतर ये तत्व मौजूद होते हैं: प्रोटीन- 25.3 ग्राम, नमी- 3 ग्राम, फैट्स- 40.1 ग्राम, मिनरल्स- 2.4 ग्राम, फाइबर- 3.1 ग्राम, कार्बोहाइड्रेट- 26.1 ग्राम, ऊर्जा- 567 कैलोरी, कैल्शियम - 90 मिलीग्राम, फॉस्फोरस 350 मिलीग्राम, आयरन-2.5 मिलीग्राम, कैरोटीन- 37 मिलीग्राम, थाइमिन- 0.90 मिलीग्राम, फोलिक एसिड- 20मिलीग्राम। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन, मिनिरल्स आदि तत्व इसे बेहद फायदेमंद बनाते हैं। यकीनन इसके गुणों को जानने के बाद आप कम से कम इस सर्दियों में मूंगफली से टाइमपास करने का टाइम तो निकाल ही लेंगे।

🔶 7. सब्जियां
अपनी खुराक में हरी सब्जियों का सेवन करें। सब्जियां, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है और गर्मी प्रदान करती है। सर्दियों के दिनों में मेथी, गाजर, चुकंदर, पालक, लहसुन बथुआ आदि का सेवन करें। इनसे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है।

🔶 8. तिल
सर्दियों के मौसम में तिल खाने से शरीर को ऊर्जा मिलती है। तिल के तेल की मालिश करने से ठंड से बचाव होता है। तिल और मिश्री का काढ़ा बनाकर खांसी में पीने से जमा हुआ कफ निकल जाता है। तिल में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं जैसे, प्रोटीन, कैल्शियम, बी कॉम्प्लेक्स और कार्बोहाइट्रेड आदि। प्राचीन समय से खूबसूरती बनाए रखने के लिए तिल का उपयोग किया जाता रहा है।

बालों की देखभाल,

बालों की देखभाल🌺
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1. अमरबेल : 250 ग्राम अमरबेल को लगभग 3 लीटर पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाये तो इसे उतार लें। सुबह इससे बालों को धोयें। इससे बाल लंबे होते हैं।Ash.... 👤

2. त्रिफला : त्रिफला के 2 से 6 ग्राम चूर्ण में लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग लौह भस्म मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से बालों का झड़ना बन्द हो जाता है।

3. कलौंजी : 50 ग्राम कलौंजी 1 लीटर पानी में उबाल लें। इस उबले हुए पानी से बालों को धोएं। इससे बाल 1 महीने में ही काफी लंबे हो जाते हैं।

4. नीम : नीम और बेर के पत्तों को पानी के साथ पीसकर सिर पर लगा लें और इसके 2-3 घण्टों के बाद बालों को धो डालें। इससे बालों का झड़ना कम हो जाता है और बाल लंबे भी होते हैं।
Ash.... 👤
5. लहसुन : लहसुन का रस निकालकर सिर में लगाने से बाल उग आते हैं।

6. सीताफल : सीताफल के बीज और बेर के बीज के पत्ते बराबर मात्रा में लेकर पीसकर बालों की जड़ों में लगाएं। ऐसा करने से बाल लंबे हो जाते हैं।

7. आम : 10 ग्राम आम की गिरी को आंवले के रस में पीसकर बालों में लगाना चाहिए। इससे बाल लंबे और घुंघराले हो जाते हैं।Ash.... 👤

8. शिकाकाई : शिकाकाई और सूखे आंवले को 25-25 ग्राम लेकर थोड़ा-सा कूटकर इसके टुकड़े कर लें। इन टुकड़ों को 500 ग्राम पानी में रात को डालकर भिगो दें। सुबह इस पानी को कपड़े के साथ मसलकर छान लें और इससे सिर की मालिश करें। 10-20 मिनट बाद नहा लें। इस तरह शिकाकाई और आंवलों के पानी से सिर को धोकर और बालों के सूखने पर नारियल का तेल लगाने से बाल लंबे, मुलायम और चमकदार बन जाते हैं। गर्मियों में यह प्रयोग सही रहता है। इससे बाल सफेद नहीं होते अगर बाल सफेद हो भी जाते हैं तो वह काले हो जाते हैं।

9. मूली : आधी से 1 मूली रोजाना दोपहर में खाना-खाने के बाद, कालीमिर्च के साथ नमक लगाकर खाने से बालों का रंग साफ होता है और बाल लंबे भी हो जाते हैं। इसका प्रयोग 3-4 महीने तक लगातार करें। 1 महीने तक इसका सेवन करने से कब्ज, अफारा और अरुचि में आराम मिलता है।

नोट : मूली जिसके लिए फयदेमन्द हो वही इसका प्रयोग कर सकते हैं।

10. आंवला : सूखे आंवले और मेंहदी को समान मात्रा में लेकर शाम को पानी में भिगो दें। प्रात: इससे बालों को धोयें। इसकाप्रयोग लगातार कई दिनों तक करने से बाल मुलायम और लंबे हो जायेंगे।
Ash..... 👤
11. ककड़ी : ककड़ी में सिलिकन और सल्फर अधिक मात्रा में होताहै जो बालों को बढ़ाते हैं। ककड़ी के रस से बालों को धोने से तथा ककड़ी, गाजर और पालक सबको मिलाकर रस पीने से बाल बढ़ते हैं। यदि यह सब उपलब्ध न हो तो जो भी मिले उसका रस मिलाकर पी लें। इस प्रयोग से नाखून गिरना भी बन्द हो जाता है।
Ash...... 👤
12. रीठा* कपूर कचरी 100 ग्राम, नागरमोथा 100 ग्राम, कपूर तथा रीठे के फल की गिरी 40-40 ग्राम, शिकाकाई 250 ग्राम और आंवले 200 ग्राम की मात्रा में लेकर सभी का चूर्ण तैयार कर लें। इस मिश्रण के 50 ग्राम चूर्ण में पानी मिलाकर लुग्दी (लेप) बनाकर बालों में लगाना चाहिए। इसके पश्चात् बालों को गरम पानी से खूब साफ कर लें। इससे सिर के अन्दर की जूं-लींकें मर जाती हैं और बाल मुलायम हो जाते हैं।
Ash... 👤
* रीठा, आंवला, सिकाकाई तीनों को मिलाने के बाद बाल धोने से बाल सिल्की, चमकदार, रूसी-रहित और घने हो जाते हैं।

13. गुड़हल :
* गुड़हल के फूलों के रस को निकालकर सिर में डालने से बाल बढ़ते हैं।

* गुड़हल के पत्तों को पीसकर लुग्दी बना लें। इस लुग्दी को नहाने से 2 घंटे पहले बालों की जड़ों में मालिश करके लगायें। फिर नहायें और इसे साफ कर लें। इस प्रयोग को नियमित रूप से करते रहने से न केवल बालों को पोषण मिलेगा, बल्कि सिर में भी ठंड़क का अनुभव होगा।

* गुड़हल के पत्ते और फूलों को बराबर की मात्रा में लेकर पीसकर लेप तैयार करें। इस लेप को सोते समय बालों में लगाएं और सुबह धोयें। ऐसा कुछ दिनों तक नियमित रूप से करने से बाल स्वस्थ बने रहते हैं।

* गुड़हल के ताजे फूलों के रस में जैतून का तेल बराबर मिलाकरआग पर पकायें, जब जल का अंश उड़ जाये तो इसे शीशी में भरकर रख लें। रोजाना नहाने के बाद इसे बालों की जड़ों में मल-मलकर लगाना चाहिए। इससे बाल चमकीले होकर लंबे हो जाते हैं।

14. शांखपुष्पी : शांखपुष्पी से निर्मित तेल रोज लगाने से सफेद बाल काले हो जाते हैं।

15. भांगरा :
* बालों को छोटा करके उस स्थान पर जहां पर बाल न हों भांगरा के पत्तों के रस से मालिश करने से कुछ ही दिनों में अच्छे काले बाल निकलते हैं जिनके बाल टूटते हैं या दो मुंहे हो जाते हैं। उन्हें इस प्रयोग को अवश्य ही करना चाहिए।

* त्रिफला के चूर्ण को भांगरा के रस में 3 उबाल देकर अच्छी तरह से सुखाकर खरल यानी पीसकर रख लें। इसे प्रतिदिन सुबह के समय लगभग 2 ग्राम तक सेवन करने से बालों का सफेद होना बन्द जाता है तथा इससे आंखों की रोशनी भी बढ़ती है।

* आंवलों का मोटा चूर्ण करके, चीनी के मिट्टी के प्याले में रखकर ऊपर से भांगरा का इतना डाले कि आंवले उसमें डूब जाएं। फिर इसे खरलकर सुखा लेते हैं। इसी प्रकार 7 भावनाएं (उबाल) देकर सुखा लेते हैं। प्रतिदिन 3 ग्राम की मात्रा में ताजे पानी के साथ सेवन से करने से असमय ही बालों का सफेद होना बन्द जाता है। यह आंखों की रोशनी को बढ़ाने वाला, उम्र को बढ़ाने वाला लाभकारी योग है।

* भांगरा, त्रिफला, अनन्तमूल और आम की गुठली का मिश्रण तथा 10 ग्राम मण्डूर कल्क व आधा किलो तेल को एक लीटर पानी के साथपकायें। जब केवल तेल शेष बचे तो इसे छानकर रख लें। इसके प्रयोग से बालों के सभी प्रकार के रोग मिट जाते हैं।

16. अनन्तमूल : अनन्तमूल की जड़ का चूर्ण 2-2 ग्राम दिन में 3 बार पानी के साथ सेवन करने से सिर का गंजापन दूर होता है।

17. तिल :
* तिल के पौधे की जड़ और पत्तों के काढ़े से बालों को धोने सेबालों पर काला रंग आने लगता है।

* काले तिलों के तेल को शुद्ध करके बालों में लगाने से बाल असमय में सफेद नहीं होते हैं। प्रतिदिन सिर में तिल के तेल की मालिश करने से बाल हमेशा मुलायम, काले और घने रहते हैं।

* तिल के फूल और गोक्षुर को बराबर मात्रा में लेकर घी और शहद में पीसकर लेप बना लें। इसे सिर पर लेप करने से गंजापन दूर होता है।

* तिल के तेल की मालिश करने के एक घंटे बाद एक तौलिया गर्म पानी में डुबोकर उसे निचोड़कर सिर पर लपेट लें तथा ठण्डा होने पर दोबारा गर्म पानी में डुबोकर निचोड़कर सिर पर लपेट लें। इस प्रकार 5 मिनट लपेटे रखें। फिर ठंड़े पानी से सिर को धो लें। ऐसा करने से बालों की रूसी दूर हो जाती है।

Medical Fitness

Medical Fitness :---
--------------------------

         " Cholesterol "
           --------------------

Cholesterol ---   <  200

HDL  ---  40  ---  60

LDL  ---    <  100

VLDL --     <  30

Triglycerides --   <  150


         Cholesterol
         -------------------

Borderline --200 -- 239

High ----    >  240

V.High --    >  250


            LDL
           --------

Borderline --130 ---159

High ---  160  ---  189

V.High --  > 190


         
           Triglycerides
           ---------------------

Borderline - 150 -- 199

High --   200  ---  499

V.High --     >   500

-------------------------------------

       
        Platelets Count
       --------------------------

1.50  Lac  ----  4.50 Lac


----------------------------------------

              Blood
             -----------

Vitamin-D --  50   ----  80

Uric Acid --  3.50  ---  7.20

-----------------------------------------

            Kidney
            -----------

Urea  ---   17   ---   43

Calcium --  8.80  --  10.60

Sodium --  136  ---  146

Protein  --   6.40  ---  8.30

  --------------------------------------


           High BP
          ---------------

120/80 --  Normal

130/85 --Normal  (Control)

140/90 --  High

150/95 --  V.High



         Low BP
        --------------

120/80 --  Normal

110/75 --  Normal  (Control)

100/70 --  Low

90//65 --   V.Low

 ---------------------------------------

              Suger
             -----------

Glucose (F) --  70  ---  100

(12 hrs Fasting)

Glucose (PP) --  70  --- 140

(2 hrs after eating)

Glucose (R) --  70  ---  140

(After 2 hrs)

 ----------------------------------------
    
             Haemoglobin
            ---------------------

Male --  13  ---  17

Female --  11 ---  15

RBC Count  -- 4.50 -- 5.50
                           (million)

 --------------------------------------

           Pulse
          -----------

72  per minute (standard)

60 --- 80 p.m. (Normal)

40 -- 180  p.m.(abnormal)

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          Temperature
          ---------------------

98.4 F    (Normal)

99.0 F Above  (Fever)

गर्म पानी के फायदे


 गर्म पानी के फायदे 💠
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1⃣ अगर आप स्किन प्रॉब्लम्स से परेशान हैं या ग्लोइंग स्किन के लिए तरह-तरह के कॉस्मेटिक्स यूज करके थक चूके हैं तो रोजाना एक गिलास गर्म पानी पीना शुरू कर दें। आपकी स्किन प्रॉब्लम फ्री हो जाएगी व ग्लो करने लगेगी।
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2⃣ लड़कियों को पीरियड्स के दौरान अगर पेट दर्द हो तो ऐसे में एक गिलास गुनगुना पानी पीने से राहत मिलती है। दरअसल इस दौरान होने वाले पैन में मसल्स में जो खिंचाव होता है उसे गर्म पानी रिलैक्स कर देता है।
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3⃣ गर्म पानी पीने से शरीर के विषैले तत्व बाहर हो जाते हैं। सुबह खाली पेट व रात्रि को खाने के बाद पानी पीने से पाचन संबंधी दिक्कते खत्म हो जाती है व कब्ज और गैस जैसी समस्याएं परेशान नहीं करती हैं।
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4⃣ भूख बढ़ाने में भी एक गिलास गर्म पानी बहुत उपयोगी है। एक गिलास गर्म पानी में एक नींबू का रस और काली मिर्च व नमक डालकर पीएं। इससे पेट का भारीपन कुछ ही समय में दूर हो जाएगा।
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5⃣ खाली पेट गर्म पानी पीने से मूत्र से संबंधित रोग दूर हो जाते हैं। दिल की जलन कम हो जाती है। वात से उत्पन्न रोगों में गर्म पानी अमृत समान फायदेमंद हैं।
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6⃣ गर्म पानी के नियमित सेवन से ब्लड सर्कुलेशन भी तेज होता है। दरअसल गर्म पानी पीने से शरीर का तापमान बढ़ता है। पसीने के माध्यम से शरीर की सारे जहरीले तत्व बाहर हो जाते हैं।
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7⃣ बुखार में प्यास लगने पर मरीज को ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए। गर्म पानी ही पीना चाहिए बुखार में गर्म पानी अधिक लाभदायक होता है।
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8⃣ यदि शरीर के किसी हिस्से में गैस के कारण दर्द हो रहा हो तो एक गिलास गर्म पानी पीने से गैस बाहर हो जाती है।
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9⃣ अधिकांश पेट की बीमारियां दूषित जल से होती हैं यदि पानी को गर्म कर फिर ठंडा कर पीया जाए तो जो पेट की कई अधिकांश बीमारियां पनपने ही नहीं पाएंगी।
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🔟 गर्म पानी पीना बहुत उपयोगी रहता है इससे शक्ति का संचार होता है। इससे कफ और सर्दी संबंधी रोग बहुत जल्दी दूर हो जाते हैं।
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1⃣1⃣ दमा ,हिचकी ,खराश आदि रोगों में और तले भुने पदार्थों के सेवन के बाद गर्म पानी पीना बहुत लाभदायक होता है।
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1⃣2⃣ सुबह खाली पेट एक गिलास गर्म पानी में एक नींबू मिलाकर पीने से शरीर को विटामिन सी मिलता है। गर्म पानी व नींबू का कॉम्बिनेशन शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करता है।साथ ही पी.एच. का स्तर भी सही बना रहता है।
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1⃣3⃣ रोजाना एक गिलास गर्म पानी सिर के सेल्स के लिए एक गजब के टॉनिक का काम करता है। सिर के स्केल्प को हाइड्रेट करता है जिससे स्केल्प ड्राय होने की प्रॉब्लम खत्म हो जाती है।
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1⃣4⃣ वजन घटाने में भी गर्म पानी बहुत मददगार होता है। खाने के एक घंटे बाद गर्म पानी पीने से मेटॉबालिम्म बढ़ता है। यदि गर्म पानी में थोड़ा नींबू व कुछ बूंदे शहद की मिला ली जाएं तो इससे बॉडी स्लिम हो जाती है।
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1⃣5⃣ हमेशा जवान दिखते रहने की चाहत रखने वाले लोगों के लिए गर्म पानी एक बेहतरीन औषधि का काम करता है।
अगर अपने दोस्तो से प्यार है  तो  सभी दोस्तो को सेन्ड करे वरना ये मेसेज आपके लिये फिजूल है

All You Need to Know About Chyawanprash

All You Need to Know About Chyawanprash

Chyawanprash has been an important part of our Indian household for many years. But how much do you really know about Chyawanprash? Read more to check your knowledge!

What is Chyawanprash?

Chyawanprash is an ayurvedic health supplement with a powerful combination of over 40 herbs and plant extracts in a base of amla.

What are its health benefits?

Chyawanprash boosts immunity, detoxifies the body, delays aging, prevents cough and cold, improves concentration and has antioxidant properties.

How much should you take and when?

The best time to have it is in the morning and on an empty stomach. However you may have it anytime in the day. For adults, the recommended dose is 1-2 teaspoons; 1-2 times daily and for children, ½ teaspoon with milk or warm water once a day.

How to choose the right Chyawanprash?

There are many types of Chyawanprash available in the market. You could choose the one that is best per your health needs. The most common variants are:

1 . Chyawanprash with Kesar: for cough, low weight, weakness

2 . Chyawanprash without Sugar: for diabetic patients

3 . Chyawanprash with Silver & Gold: for improving immunity and sexual performance

Are there any side effects?

Chyawanprash is a safe health supplement with minimal side effects. In some people it may cause indigestion, acidity and loose stools.

Does Chyawanprash lead to weight gain?

No, Chyawanprash doesn’t lead to weight gain. In fact, it helps in regulating weight. If you are underweight, it will help you gain weight and if overweight, it will help you lose weight and strengthen your bones.

Does it cause pimples?

Chyawanprash doesn’t cause pimples. It contains amla which is one of the best source of Vitamin C. Vitamin C prevents clogging of skin pores thus reducing pimple formation.

How to know if it’s pure?

Some unlicensed manufacturers add lauki (Bottle Gourd) and Sitaphal (custard apple) while preparing Chyawanprash to increase its quantity and reduce the cost of manufacturing. Use the Water Check to check for this adulteration. Add a spoonful of Chyawanprash in a glass of water. If it is pure, it will sink immediately and the particles will not float on top

आयुर्वेदिक दोहे


 ∥ आयुर्वेदिक दोहे ∥ ۞
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१Ⓜदही मथें माखन मिले, केसर संग मिलाय,
होठों पर लेपित करें, रंग गुलाबी आय..
२Ⓜबहती यदि जो नाक हो, बहुत बुरा हो हाल,
यूकेलिप्टिस तेल लें, सूंघें डाल रुमाल..
३Ⓜअजवाइन को पीसिये , गाढ़ा लेप लगाय,
चर्म रोग सब दूर हो, तन कंचन बन जाय..
४Ⓜअजवाइन को पीस लें , नीबू संग मिलाय,
फोड़ा-फुंसी दूर हों, सभी बला टल जाय..
५Ⓜअजवाइन-गुड़ खाइए, तभी बने कुछ काम,
पित्त रोग में लाभ हो, पायेंगे आराम..
६Ⓜठण्ड लगे जब आपको, सर्दी से बेहाल,
नीबू मधु के साथ में, अदरक पियें उबाल..
७Ⓜअदरक का रस लीजिए. मधु लेवें समभाग,
नियमित सेवन जब करें, सर्दी जाए भाग..
८Ⓜरोटी मक्के की भली, खा लें यदि भरपूर,
बेहतर लीवर आपका, टी.बी भी हो दूर..
९Ⓜगाजर रस संग आँवला, बीस औ चालिस ग्राम,
रक्तचाप हिरदय सही, पायें सब आराम..
१०Ⓜशहद आंवला जूस हो, मिश्री सब दस ग्राम,
बीस ग्राम घी साथ में, यौवन स्थिर काम..
११Ⓜचिंतित होता क्यों भला, देख बुढ़ापा रोय,
चौलाई पालक भली, यौवन स्थिर होय..
१२Ⓜयलाल टमाटर लीजिए, खीरा सहित सनेह,
जूस करेला साथ हो, दूर रहे मधुमेह..
१३Ⓜप्रातः संध्या पीजिए, खाली पेट सनेह,
जामुन-गुठली पीसिये, नहीं रहे मधुमेह..
१४Ⓜसात पत्र लें नीम के, खाली पेट चबाय, दूर करे मधुमेह को, सब कुछ मन को भाय..
१५Ⓜसात फूल ले लीजिए, सुन्दर सदाबहार,
दूर करे मधुमेह को, जीवन में हो प्यार..
१६Ⓜतुलसीदल दस लीजिए, उठकर प्रातःकाल,
सेहत सुधरे आपकी, तन-मन मालामाल..
१७Ⓜथोड़ा सा गुड़ लीजिए, दूर रहें सब रोग,
अधिक कभी मत खाइए, चाहे मोहनभोग.
१८Ⓜअजवाइन और हींग लें, लहसुन तेल पकाय,
मालिश जोड़ों की करें, दर्द दूर हो जाय..
१९Ⓜऐलोवेरा-आँवला, करे खून में वृद्धि,
उदर व्याधियाँ दूर हों,जीवन में हो सिद्धि..
२०Ⓜदस्त अगर आने लगें, चिंतित दीखे माथ,
दालचीनि का पाउडर, लें पानी के साथ..Akkii..
२१Ⓜमुँह में बदबू हो अगर, दालचीनि मुख डाल,
बने सुगन्धित मुख, महक, दूर होय तत्काल..
२२Ⓜकंचन काया को कभी, पित्त अगर दे कष्ट,
घृतकुमारि संग आँवला, करे उसे भी नष्ट..
२३Ⓜबीस मिली रस आँवला, पांच ग्राम मधु संग,
सुबह शाम में चाटिये, बढ़े ज्योति सब दंग..
२४Ⓜबीस मिली रस आँवला, हल्दी हो एक ग्राम,
सर्दी कफ तकलीफ में, फ़ौरन हो आराम..
२५Ⓜनीबू बेसन जल शहद, मिश्रित लेप लगाय,
चेहरा सुन्दर तब बने, बेहतर यही उपाय..
२६.Ⓜमधु का सेवन जो करे, सुख पावेगा सोय,
कंठ सुरीला साथ में, वाणी मधुरिम होय.
२७.Ⓜपीता थोड़ी छाछ जो, भोजन करके रोज,
नहीं जरूरत वैद्य की, चेहरे पर हो ओज..
२८Ⓜठण्ड अगर लग जाय जो नहीं बने कुछ काम, नियमित पी लें गुनगुना, पानी दे आराम..
२९Ⓜकफ से पीड़ित हो अगर, खाँसी बहुत सताय,
अजवाइन की भाप लें, कफ तब बाहर आय..
३०Ⓜअजवाइन लें छाछ संग, मात्रा पाँच गिराम, कीट पेट के नष्ट हों, जल्दी हो आराम..
३१Ⓜछाछ हींग सेंधा नमक, दूर करे सब रोग,
जीरा उसमें डालकर, पियें सदा यह भोग..।

सुंदरकाण्ड से जुड़ी 5 अहम बातें

सुंदरकाण्ड से जुड़ी 5 अहम बातें जो
कोई नहीं जानता
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**********************
1. सुंदरकाण्ड का नाम सुंदरकाण्ड क्यों
रखा गया?
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हनुमानजी, सीताजी की खोज में लंका
गए थे और लंका त्रिकुटाचल पर्वत पर
बसी हुई थी। त्रिकुटाचल पर्वत यानी
यहां 3 पर्वत थे। पहला सुबैल पर्वत, जहां
के मैदान में युद्ध हुआ था।
दूसरा नील पर्वत, जहां राक्षसों के महल
बसे हुए थे और तीसरे पर्वत का नाम है
सुंदर पर्वत, जहां अशोक वाटिका
निर्मित थी। इसी अशोक वाटिका में
हनुमानजी और सीताजी की भेंट हुई
थी। इस काण्ड की यही सबसे प्रमुख
घटना थी, इसलिए इसका नाम
सुंदरकाण्ड रखा गया है।
2. शुभ अवसरों पर ही सुंदरकांड का
पाठ क्यों?
==============================
शुभ अवसरों पर गोस्वामी तुलसीदास
द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के
सुंदरकांड का पाठ किया जाता है। शुभ
कार्यों की शुरुआत से पहले सुंदरकांड का
पाठ करने का विशेष महत्व माना गया
है।
जब भी किसी व्यक्ति के जीवन में
ज्यादा परेशानियां हों, कोई काम
नहीं बन रहा हो, आत्मविश्वास की
कमी हो या कोई और समस्या हो,
सुंदरकांड के पाठ से शुभ फल प्राप्त होने
लग जाते हैं। कई ज्योतिषी और संत भी
विपरीत परिस्थितियों में सुंदरकांड
का पाठ करने की सलाह देते हैं।
3. जानिए सुंदरकांड का पाठ विशेष रूप
से क्यों किया जाता है?
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==========
माना जाता है कि सुंदरकाण्ड के पाठ
से हनुमानजी प्रसन्न होते हैं। सुंदरकाण्ड
के पाठ से बजरंग बली की कृपा बहुत ही
जल्द प्राप्त हो जाती है।
जो लोग नियमित रूप से इसका पाठ
करते हैं, उनके सभी दुख दूर हो जाते हैं। इस
काण्ड में हनुमानजी ने अपनी बुद्धि और
बल से सीता की खोज की है। इसी
वजह से सुंदरकाण्ड को हनुमानजी की
सफलता के लिए याद किया जाता है।
4. सुंदरकांड से मिलता है
मनोवैज्ञानिक लाभ
============================
वास्तव में श्रीरामचरितमानस के
सुंदरकांड की कथा सबसे अलग है। संपूर्ण
श्रीरामचरितमानस भगवान श्रीराम के
गुणों और उनके पुरुषार्थ को दर्शाती है।
सुंदरकांड एकमात्र ऐसा अध्याय है जो
श्रीराम के भक्त हनुमान की विजय का
कांड है।
मनोवैज्ञानिक नजरिए से देखा जाए
तो यह आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति
बढ़ाने वाला कांड है। सुंदरकांड के पाठ
से व्यक्ति को मानसिक शक्ति प्राप्त
होती है। किसी भी कार्य को पूर्ण
करने के लिए आत्मविश्वास मिलता है।
5. सुंदरकाण्ड से मिलता है धार्मिक
लाभ
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सुंदरकांड के लाभ से मिलता है धार्मिक
लाभ हनुमानजी की पूजा सभी
मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली
मानी गई है। बजरंग बली बहुत जल्दी
प्रसन्न होने वाले देवता हैं। शास्त्रों में
इनकी कृपा पाने के कई उपाय बताए गए
हैं, इन्हीं उपायों में से एक उपाय
सुंदरकांड का पाठ करना है। सुंदरकांड के
पाठ से हनुमानजी के साथ ही श्रीराम
की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है।
किसी भी प्रकार की परेशानी हो,
सुंदरकांड के पाठ से दूर हो जाती है। यह
एक श्रेष्ठ और सबसे सरल उपाय है। इसी
वजह से काफी लोग सुंदरकांड का पाठ
नियमित रूप करते हैं।
हनुमानजी जो कि वानर थे, वे समुद्र
को लांघकर लंका पहुंच गए और वहां
सीता की खोज की। लंका को
जलाया और सीता का संदेश लेकर
श्रीराम के पास लौट आए। यह एक भक्त
की जीत का कांड है, जो अपनी
इच्छाशक्ति के बल पर इतना बड़ा
चमत्कार कर सकता है। सुंदरकांड में
जीवन की सफलता के महत्वपूर्ण सूत्र
भी दिए गए हैं। इसलिए पूरी रामायण में
सुंदरकांड को सबसे श्रेष्ठ माना जाता
है, क्योंकि यह व्यक्ति में आत्मविश्वास
बढ़ाता है। इसी वजह से सुंदरकांड का
पाठ विशेष रूप से किया जाता है।
     जय श्री राम

हृदयविकार आणि त्यासंबंधी घ्यावयाच्या उपायांसंदर्भात मार्गदर्शन. हृदयाची काळजी कशी घ्यावी

बंगळुरू येथील प्रसिद्ध नारायणा हृदयालय रुग्णालयाचे प्रमुख डॉ. देवी शेट्टी यांच्याशी विप्रो येथील कर्मचार्‍यांनी हृदयविकार आणि त्यासंबंधी घ्यावयाच्या उपायांसंदर्भात केलेले मार्गदर्शन.

प्र. - हृदयाची काळजी कशी घ्यावी?
उ. - १) योग्य खान-पान, कमी कार्बोहाड्रेटस, जास्त प्रोटीन आणि कमी तेल.
२) आठवड्यातून किमान अर्धा तास चालणे, लिफ्टचा वापर न करणे, एका ठिकाणी जास्त वेळ बसू नये.
३) स्मोकिंग बंद करावी.
४) वजन नियंत्रणात ठेवणे.
५) बी. पी. (ब्लडप्रेशर) आणि शुगर नियंत्रणात ठेवणे.

प्र. - नॉनव्हेजमध्ये मासे हृदयासाठी चांगले असतात का?
उ. - नाही

प्र. - एखाद्या तंदरुस्त व्यक्तीला अचानक हृदयविकाराचा झटका का येतो?
उ. याला सायलेंट अटॅक म्हणतात. त्यामुळे वय वर्षे ३० नंतर नियमित चेकअप करावे.

प्र. - हृदयविकार हा अनुवंशिक आजार आहे का?
उ. - होय!

प्र. - हृदयावरील तणाव कमी करण्यासाठी काय केले पाहिजे.
उ. - आयुष्याकडे पाहण्याचा दृष्टिकोन बदलायला हवा. प्रत्येक गोष्ट मिळालीच पाहिजे असा अट्टाहास करू नये.

प्र. -  चालणे चांगले की जॉगिंग? जिममध्ये व्यायाम केल्यास हृदयासाठी चांगले असते का?
उ. - चालणे कधीही चांगलेच. जॉगिंंगमुळे शरीराच्या जॉईंट्सना इजा पोहोचू शकते.

प्र. - कमी रक्तदाब असलेल्या व्यक्तींना हृदयविकार होतो का?
उ. - शक्यता फारच कमी.

प्र. - कोलेस्ट्रॉल वाढण्याची प्रक्रिया कधी होते. ३० वर्षांनंतर कोलेस्ट्रॉलची काळजी घ्यावी का?
उ. - शरीरात लहानपणापासूनच कोलेस्ट्रॉल असते.

प्र. - अनियमित खाण्यामुळे हृदयावर काय परिणाम होतो.
उ. - अनियमित खात असा आणि त्यातही जंकफूड असेल तर पचनसंस्थेमध्येच गडबड होते.

प्र. - औषध न घेता कोलेस्ट्रॉल कसा नियंत्रणात आणावा?
उ. - खाण्यावर नियंत्रण, नियमित चालणे आणि आक्रोड खाणे.

प्र. - हृदयासाठी कोणते अन्न चांगले आणि वाईट आहे?
उ. - फळे आणि भाज्या हृदयासाठी चांगल्या. तेल सर्वांत वाईट.

प्र. - कोणते तेल चांगले? सूर्यफूल, शेंगदाणा, सोयाबीन, ऑलिव्ह ऑईल?
उ. - सवर्च तेल वाईट.

प्र. - नियमित वैद्यकीय तपासणी म्हणजे काय?
उ. - वय वर्षे ३० नंतर सहा महिन्यांतून एकदा रक्त तपास करवी, शुगर आणि कोलेस्ट्रॉल, बी.पी. चेक करावा. डॉक्टरांच्या सल्ल्याने ट्रेड मील आणि इको टेस्ट करावी.

प्र. - हृदयविकाराचा झटका आल्यानंतर प्रथमोपचार काय करावेत?
उ. - त्या रुग्णाला तत्काळ झोपवावे, त्याच्या जिभेखालच्या बाजूला ऍस्पिरीन किंवा सॉरबिट्रेट ही गोळी ठेवावी. वेळ न दवडता आणि ऍम्ब्युलन्सची वाट न पाहता जवळच्या हृदयविकार रुग्णालयात तत्काळ घेऊन जावे. बहुतांशी मृत्यू पहिल्या एक तासात होतात.

प्र. - ऍसिडीटी, गॅसेसमुळे छातीत होणारी जळजळ आणि हृदयविकाराचा त्रास हे कसे ओळखावेत?
उ. - डॉक्टरांकडे जाऊन ई.सी.जी. केल्याशिवाय हे समजणे कठीण आहे.

प्र. - तरुणांमध्ये ३० ते ४० वर्षांच्या आत हृदयविकाराचा झटका येण्याचे प्रमाण का वाढले आहे?
उ. - चुकीची लाईफस्टाईल, स्मोकिंग, जंकफूड, व्यायामाचा अभाव यामुळे अमेरिका आणि युरोपपेक्षा तीनपट जास्तm हृदयविकाराचे रुग्ण India  आहेत.

प्र. - अनेकांचे जीवनमान दगदगीचे आहे. अनेकांना रात्रपाळी करावी लागते. त्याचा परिणाम हृदयावर होतो का?
उ. - जेव्हा तुम्ही तरुण असता तेव्हा निसर्ग रक्षण करीत असतो. परंतु जसजसे वय वाढत जाते, तसा शरीरराचाही आपण आदर केला पाहिजे. यात बदल हवा.

प्र. - जवळच्या नातेवाईकांमध्ये लग्न केल्यामुळे जन्मलेल्या मुलाला हृदयाचा काही आजार असू शकतो का?
उ. - होय! काही प्रमाणात मुलांमध्ये ही लक्षणे दिसू शकतात.

प्र. - उच्च रक्तदाब म्हणजे बी. पी. (ब्लडप्रेशर) नियंत्रित ठेवण्यासाठी घेण्यात येणार्‍या औषधांचे साईड इफेक्ट दिसतात का?
उ. - होय! अनेक औषधांचे साईड इफेक्ट असतात. मात्र, सध्या अनेक सुधारणा झाल्यामुळे आधुनिक औषधे अधिक चांगली आहेत.

प्र. - जास्त चहा, कॉफी घेतल्यामुळे हार्टऍटॅक येतो का?
उ. - नाही!

प्र. - अस्थमाचा आजार आणि हृदयविकाराचा काही संबंध आहे का?
उ. - नाही!

प्र. - केळी खाल्ल्यामुळे बी. पी. नियंत्रणात येतो का?
उ. - नाही!

प्र. - जंकफूड म्हणजे काय?
उ. - फ्राईड केलेेले मॅकडोनल्डस आणि तत्सम ठिकाणी बनविले जाणारे अन्न, समोसा आणि मसाला डोसाही.

प्र. - नियमित चालण्यासाठी वेळ मिळाला नाही आणि एकाच जागी खूप वेळ बसून काम करावे लागत असेल तर काय करावे?
उ. - एकाच जागी तासाभरापेक्षा जास्त वेळ बसू नये. जागेवरच थोडा वेळ उभे राहावे किंवा एका खुर्चीवरून दुसर्‍या खुर्चीवर बसले तरीही चालते, पण आठवड्यातून पाच दिवस किमान अर्धा तास चालल्यास उत्तमच!

टीप : मित्रांनो, आजपर्यंत आपण विनोद, वात्रटिका, कविता, शेरोशायरी तसेच काही पांचट विनोद वाचून हसून मजा केली;
परंतु आपल्या स्वत:च्या शरीराबद्दल आपण कधीच विचार केला नाही.
तरी हा मेसेज वाचताना तुमचे पाच ते दहा मिनिटे नक्कीच गेले असतील.
परंतु हा मेसेज वाचल्यामुळे माझ्या मित्रांनाच काय, सर्वांनाच याचा फायदा होईल.कारन सद्या तरुण वयातच  हृदयवीकाराने मरण पावनाऱ्यांची संख्या वाढत आहे त्यामुळे आपण काळजी घेतलेली बरी

 जीवन अमूल्य आहे.

जीवनोपयोगी : घरेलु नुस्खे

         जीवनोपयोगी

1.  सुबह उठ कर कैसा पानी पीना चाहिए

    उत्तर -     हल्का गर्म

2.  पानी पीने का क्या तरीका होता है

    उत्तर -    सिप सिप करके व नीचे बैठ कर

3.  खाना कितनी बार चबाना चाहिए

     उत्तर. -    32 बार

4.  पेट भर कर खाना कब खाना चाहिए

     उत्तर. -     सुबह

5.  सुबह का नाश्ता कब तक खा लेना चाहिए

     उत्तर. -    सूरज निकलने के ढाई घण्टे तक

6.  सुबह खाने के साथ क्या पीना चाहिए
    
     उत्तर. -     जूस

7.  दोपहर को खाने के साथ क्या पीना चाहिए

    उत्तर. -     लस्सी / छाछ

8.  रात को खाने के साथ क्या पीना चाहिए

    उत्तर. -     दूध

9.  खट्टे फल किस समय नही खाने चाहिए

    उत्तर. -     रात को

10. लस्सी खाने के साथ कब पीनी चाहिए

      उत्तर. -      दोपहर को

11. खाने के साथ जूस कब लिया जा सकता है

      उत्तर. -      सुबह

12. खाने के साथ दूध कब ले सकते है

      उत्तर. -      रात को

13. आईसक्रीम कब कहानी चाहिए

       उत्तर. -      कभी नही

14. फ्रिज़ से निकाली हुई चीज कितनी देर बाद
      खानी चाहिए

      उत्तर. -    1 घण्टे बाद

१५. क्या कोल्ड ड्रिंक पीना चाहिए

       उत्तर. -      नहीं

16. बना हुआ खाना कितनी देर बाद तक खा
      लेना चाहिए

      उत्तर. -     40 मिनट

17. रात को कितना खाना खाना चाहिए

       उत्तर. -    न के बराबर

18. रात का खाना किस समय कर लेना चाहिए

      उत्तर. -     सूरज छिपने से पहले

19. पानी खाना खाने से कितने समय पहले
      पी सकते हैं

      उत्तर. -     48 मिनट

20. क्या रात को लस्सी पी सकते हैं

     उत्तर. -     नही

21. सुबह खाने के बाद क्या करना चाहिए

       उत्तर. -     काम

22. दोपहर को खाना खाने के बाद क्या करना
       चाहिए

       उत्तर. -     आराम

23. रात को खाना खाने के बाद क्या करना
      चाहिए

      उत्तर. -    500 कदम चलना चाहिए

24. खाना खाने के बाद हमेशा क्या करना
      चाहिए

      उत्तर. -     वज्र आसन

25. खाना खाने के बाद वज्रासन कितनी देर
      करना चाहिए.
    
      उत्तर. -     5 -10 मिनट

26. सुबह उठ कर आखों मे क्या डालना चाहिए

      उत्तर. -     मुंह की लार

27. रात को किस समय तक सो जाना चाहिए

      उत्तर. -     9 - 10 बजे तक

28. तीन जहर के नाम बताओ

      उत्तर.-    चीनी , मैदा , सफेद नमक

29. दोपहर को सब्जी मे क्या डाल कर खाना
      चाहिए

      उत्तर. -     अजवायन

30. क्या रात को सलाद खानी चाहिए

      उत्तर. -     नहीं

31. खाना हमेशा कैसे खाना चाहिए

      उत्तर. -     नीचे बैठकर व खूब चबाकर

32. क्या विदेशी समान खरीदना चाहिए

      उत्तर. -     कभी नही

33. चाय कब पीनी चाहिए

      उत्तर. -     कभी नहीं

33. दूध मे क्या डाल कर पीना चाहिए

      उत्तर. -    हल्दी

34. दूध में हल्दी डालकर क्यों पीनी चाहिए

      उत्तर. -    कैंसर ना हो इसलिए

35. कौन सी चिकित्सा पद्धति ठीक है

      उत्तर. -   आयुर्वेद

36. सोने के बर्तन का पानी कब पीना चाहिए

      उत्तर. -   अक्टूबर से मार्च (सर्दियों मे)

37. ताम्बे के बर्तन का पानी कब पीना चाहिए

      उत्तर. -    जून से सितम्बर(वर्षा ऋतु)

38. मिट्टी के घड़े का पानी कब पीना चाहिए

      उत्तर. -  मार्च से जून (गर्मियों में)

39. सुबह का पानी कितना पीना चाहिए

      उत्तर. -  कम से कम 2 - 3 गिलास

40. सुबह कब उठना चाहिए

       उत्तर. -  सूरज निकलने से डेढ़ घण्टा पहले

HIGH BP की बीमारी के लिए दवा

HIGH BP की बीमारी के लिए दवा

आयुर्वेद के अनुसार high BP की बीमारी ठीक करने के लिए घर में उपलब्ध कुछ आयुर्वेदिक दबाईया है जो आप ले सकते है ।
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💢एक बहुत अच्छी दवा है आप के घर में है वो हैदालचीनीजो मसाले के रूप में उपयोग होता है वो आप पत्थर में पिस कर पावडर बनाके आधा चम्मच रोज सुबह खाली पेट गरम पानी के साथ खाइए ; अगर थोडा खर्च कर सकते है तो दालचीनी को शहद के साथ लीजिये (आधा चम्मच शहद आधा चम्मच दालचीनी) गरम पानी के साथ, ये हाई BP के लिए बहुत अच्छी दवा है ।
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💢एक और अच्छी दवा है हाई BP के लिए वो हैअर्जुन की छाल। अर्जुन एक वृक्ष होती है उसकी छाल को धुप में सुखा कर पत्थर में पिस के इसका पावडर बना लीजिये । आधा चम्मच पावडर, एक ग्लास गरम पानी में मिलाकर उबाल ले, और खूब उबालने के बाद इसको चाय की तरह पिले । ये हाई BP को ठीक करेगा, CHOLESTEROLको ठीक करेगा,TRIGLYCERIDEको ठीक करेगा, मोटापा कम करता है , हार्ट मेंARTERIESमें अगर कोईब्लोकेज है तो वो ब्लोकेज को भी निकाल देता है ये अर्जुन की छाल । डॉक्टर अक्सर ये कहते है न की दिल कमजोर है आपका; अगर दिल कमजोर हैतो आप जरुर अर्जुन की छाल लीजिये हर दिन , दिल बहुत मजबूत हो जायेगा आपका; आपकाESRठीक होगा,ejection fractionभी ठीक हो जायेगा; बहुत अछि दावा है ये अर्जुन की छाल ।
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💢या आप इस तरह भी अर्जुन और दाल चीनी को एक साथ इस्तेमाल कर सकते है, एक चम्मच अर्जुन की छाल का चूर्ण और आधा चम्मच दाल चीनी का चूर्ण एक गिलास पानी में आधा रहने तक उबाले और फिर छान कर चाय की तरह सोने से पहले पी ले।
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💢और एक अच्छी दवा है जो आप ले सकते है पर दोनों में से कोई एक । दूसरी दवा हैमेथी दाना, मेथी दाना आधा चम्मच लीजिये एक ग्लास गरम पानी में और रात को भिगो दीजिये, रात भर पड़ा रहने दीजिये पानी में और सुबह उठ कर पानी को पि लीजिये और मेथी दाने को चबा के खा लीजिये । ये बहुत जल्दी आपकीHIGH BPकम कर देगा, देड से दो महीने में एकदम स्वाभाविक कर देगा ।
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💢और एक अछि दवा है हमारे घर में वो हैलौकी कारस। एक कप लौकी का रस रोज पीना सबेरे खाली पेट नास्ता करने से एक घंटे पहले ; और इस लौकी की रस में पांचधनिया पत्ता, पांचपुदीना पत्ता, पांचतुलसी पत्तामिलाके, चारकाली मिर्चपिस के ये सब डाल के पीना .. ये बहुत अच्छा आपके BP ठीक करेगा और ये ह्रदय को भी बहुत व्यवस्थित कर देता है ,कोलेस्ट्रोलको ठीक रखेगा,डाईबेटिसमें भी काम आता है ।
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💢और एक मुफ्त की दवा है ,बेल पत्र की पत्ते–येउच्च रक्तचापमें बहुत काम आते है । पांच बेल पत्र ले कर पत्थर में पिस कर उसकी चटनी बनाइये अब इस चटनी को एक ग्लास पानी में डालकर खूब गरम कर लीजिये , इतना गरम करिए के पानी आधा हो जाये , फिर उसको ठंडा करके पि लीजिये । ये सबसे जल्दी उच्च रक्तचाप को ठीककरता है और ये बेलपत्र आपकेSUGAR को भी सामान्य कर देगा । जिनकोउच्च रक्तचापऔर SUGAR दोनों है उनके लिए बेल पत्र सबसे अछि दवा है ।
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💢और एक मुफ्त की दावा है हाई BP के लिए –देशी गाय की मूत्रपीये आधा कप रोज सुबह खाली पेट ये बहुत जल्दी हाई BP को ठीक कर देता है । और ये गोमूत्र बहुत अद्भूत है , येHIGH BPको भी ठीक करता है औरLOW BPकोभी ठीक कर देता है – दोनों में काम आता है और येही गोमूत्रडाईबेटिसको भी ठीक कर देताहै ,Arthritis , Gout (गठिया)दोनों ठीक होते है । अगर आप गोमूत्र लगातार पि रहे है तोदमाभी ठीक होता हैअस्थमाभी ठीक होता है,Tuberculosisभी ठीक हो जाती है । इसमें दो सावधानिया ध्यान रखने की है के गायसुद्धरूप से देशी हो और वो गर्भावस्था में नहो ।

बहुत ही चमत्कारी दवा: मैथीदाना, अजवाईन, काली जीरी

बहुत ही चमत्कारी दवा:
250 ग्राम मैथीदाना
100 ग्राम अजवाईन
50 ग्राम काली जीरी (ज्यादा जानकारी के लिए नीचे देखे)
उपरोक्त तीनो चीजों को साफ-सुथरा करके हल्का-हल्का सेंकना(ज्यादा सेंकना नहीं) तीनों को अच्छी तरह मिक्स करके मिक्सर में पावडर बनाकर कांच की शीशी या बरनी में भर लेवें ।
रात्रि को सोते समय एक चम्मच पावडर एक गिलास पूरा कुन-कुना पानी के साथ लेना है। गरम पानी के साथ ही लेना अत्यंत आवश्यक है लेने के बाद कुछ भी खाना पीना नहीं है। यह चूर्ण सभी उम्र के व्यक्ति ले सकतें है।
चूर्ण रोज-रोज लेने से शरीर के कोने-कोने में जमा पडी गंदगी(कचरा) मल और पेशाब द्वारा बाहर निकल जाएगी । पूरा फायदा तो 80-90 दिन में महसूस करेगें, जब फालतू चरबी गल जाएगी, नया शुद्ध खून का संचार होगा । चमड़ी की झुर्रियाॅ अपने आप दूर हो जाएगी। शरीर तेजस्वी, स्फूर्तिवाला व सुंदर बन जायेगा ।
‘‘फायदे’’
1. गठिया दूर होगा और गठिया जैसा जिद्दी रोग दूर हो जायेगा ।
2. हड्डियाँ मजबूत होगी ।
3. आॅख का तेज बढ़ेगा ।
4. बालों का विकास होगा।
5. पुरानी कब्जियत से हमेशा के लिए मुक्ति।
6. शरीर में खुन दौड़ने लगेगा ।
7. कफ से मुक्ति ।
8. हृदय की कार्य क्षमता बढ़ेगी ।
9. थकान नहीं रहेगी, घोड़े की तहर दौड़ते जाएगें।
10. स्मरण शक्ति बढ़ेगी ।
11. स्त्री का शारीर शादी के बाद बेडोल की जगह सुंदर बनेगा ।
12. कान का बहरापन दूर होगा ।
13. भूतकाल में जो एलाॅपेथी दवा का साईड इफेक्ट से मुक्त होगें।
14. खून में सफाई और शुद्धता बढ़ेगी ।
15. शरीर की सभी खून की नलिकाएॅ शुद्ध हो जाएगी ।
16. दांत मजबूत बनेगा, इनेमल जींवत रहेगा ।
17. नपुसंकता दूर होगी।
18. डायबिटिज काबू में रहेगी, डायबिटीज की जो दवा लेते है वह चालू रखना है। इस चूर्ण का असर दो माह लेने के बाद से दिखने लगेगा । जिंदगी निरोग,आनंददायक, चिंता रहित स्फूर्ति दायक और आयुष्ययवर्धक बनेगी । जीवन जीने योग्य बनेगा ।
कुछ लोग कलौंजी को काली जीरी समझ रहे है जो कि गल्त है काली जीरी अलग होती है जो आपको पंसारी/करियाणा की दुकान से मिल जाएगी जिसके नाम इस तरह से है
हिन्दी कालीजीरी, करजीरा।
संस्कृत अरण्यजीरक, कटुजीरक, बृहस्पाती।
मराठी कडूकारेलें, कडूजीरें।
गुजराती कडबुंजीरू, कालीजीरी।
बंगाली बनजीरा।
अंग्रेजी पर्पल फ्लीबेन।
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