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Saturday, January 9, 2016

अधिकांश रोगों की जड पेट का साफ़ न रहना है

अधिकांश रोगों की जड पेट का साफ़ न रहना है।पेट और आँतों को साफ़ करने की अनेक औषधियां है लेकिन उनके गुण धर्म समझ के ही प्रयोग करना उचित है। अनुलोमन स्त्रंसन भेदन विरेचन वामन शोधक छेदन लेखन आदि उनकी क्रिया भेद है।
जो द्रव्य अपक्व मल को पका कर अधोमार्ग से निकाल दे उसे अनुलोमन कहते हैं।हर्ड इसी श्रेणी में है।
जो द्रव्य अपक्व मल को बिना पकाये निकाल फेंके वो संत्रस्न कहलाता है।यथा--अमलतास का गूदा।
जो द्रव्य मल को भेद के निकाल दे वो भेदन कहलाता है।कुटकी इसका अच्छा उदाहरण है।
जो द्रव्य अपक्व और पक्व मल को पतला कर के बाहर अधोमार्ग द्वारा निकाल दे वो विरेचन कहलाता है।त्रिवृता दन्ती और इन्द्रायण मूल इसी श्रेणी में है।
जो द्रव्य कच्चे ही पित्त कफ अन्न आदि को उलटी द्वारा निकाले वो वामक है।मैनफल इसी श्रेणी में है।
देह में सञ्चित मलों को अपने स्थान से हटा कर मुख या अधोमार्ग द्वारा बाहर निकालने वाला शोधक कहलाता है।देवदाली का फल इसी श्रेणी में आता है।
जो द्रव्य शरीर में चिपके हुए कफ आदि दोषों को बलात् उखाड़ फेंकता है उसे छेदन कहते है।काली मिर्च शिलाजीत आदि इसका उदाहरण है।
इन सब बातों को ध्यान में रख कर ही उपचार लेना चाहिये।